1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

मंथन

मछली के पहले क्या था

मनुष्य की उत्पत्ति समुद्री जीव यानी मछली से भी जुड़ी हुई है. मछली कहां से आई, क्या है इंसान और मछली का रिश्ता.

समुद्री वातावरण और समुद्री पानी, जिसे हर रोज बदला जाता है. हाइडलबर्ग के यूरोपीय मॉलिक्यूलर बायोलॉजी लेबोरेट्री (ईएमबीएल) में इन खास जीवों के लिए खास वातावरण तैयार किया गया है. बिलकुल प्राकृतिक वातावरण में, यहां लगभग सवा पांच करोड़ साल पुराने जीव रखे गए हैं. यहां तक कि उनकी खास खुराक भी यहीं तैयार की जाती है, शैवाल के रूप में. अलग अलग महासागरों से लाए गए इन जीवों के लिए अलग अलग तरह की शैवाल.

स्पेन की युवा वैज्ञानिक एलिया बेनिटो गुतिरेज इन जीवों की देख भाल कर रही हैं, उन पर रिसर्च कर रही हैं. वह बताती हैं कि ये जीव कितने शर्मीले होते हैं और किस तरह रेत के काफी अंदर रहते हैं, मुश्किल से पकड़ में आते हैं. प्रयोगशाला के अंदर वह इस "कॉलोनी" को दोपहर 12 बजे बंद कर देती हैं, ताकि जीवों को शांति से रहने का मौका मिल सके. गुतिरेज का कहना है, "हमने यहां 700 लीटर प्राकृतिक समुद्री पानी से एक संरचना तैयार की है. यह पानी लगातार चलता रहता है. हमने बिलकुल समुद्री वातावरण तैयार करने की कोशिश की है. हम उनके लिए खास शैवाल भी यहीं पैदा करते हैं."

EMBL Heidelberg

जीवों को खास समुद्री माहौल में रखा जाता है.

मछली नहीं हैं

देखने में ये उजले सफेद जीव बिलकुल मछलियों की तरह लगते हैं, लेकिन गुतिरेज का कहना है, "ये जरूर मछली जैसे ही दिख रहे हैं लेकिन अभी मछली नहीं बने हैं. इनकी रीढ़ की हड्डी तो है लेकिन कई चीजें नहीं बनी हैं, जो मछली में दिखती हैं." लेकिन ये मछलियों और बाद में मानवों के पुरखे बने.

ईएमबीएल हाइडलबर्ग में स्थित है और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में रिसर्च का प्रमुख केंद्र है. हालांकि इसे यूरोप के 20 सदस्य देशों से वित्तीय मदद मिलती है, लेकिन यहां दुनिया भर के 1,000 रिसर्चर काम कर रहे हैं. ईएमबीएल की प्रवक्ता लेना रादिच का कहना है, "यह एक अंतरराष्ट्रीय जगह है और मेरे ख्याल से अभी यहां 70 मुल्कों के रिसर्चर काम कर रहे हैं." पूरे यूरोप में इसकी पांच शाखाएं हैं, जिनमें जर्मनी में दो और फ्रांस, इटली तथा ब्रिटेन में एक एक ब्रांच हैं. रादिच का कहना है कि पांचों शाखाएं मिल कर मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के क्षेत्र में इसे एक संपूर्ण संस्थान बनाते हैं.

क्या है रिसर्च

जहां तक गुतिरेज की रिसर्च का सवाल है, ईएमबीएल काफी उत्साहित है. उसका मानना है कि इस रिसर्च के बाद इंसानों की उतपत्ति को लेकर नई धारणाएं सामने आ सकती हैं. रिसर्च प्रमुख प्रोफेसर देतलेव एरेंट का कहना है कि इस जीव से बहुत कुछ नया जानने को मिल रहा है, जिसका "दिमाग बहुत सरल है" और जिसके अध्ययन से बहुत कुछ नई जानकारी मिल रही है, "यह खोज कौतूहल से जुड़ी है. ग्रीस के दर्शनशास्त्री पहले ही इस सवाल के जवाब में बहुत कुछ कह चुके हैं कि हम कैसे पैदा हुए. यह सवाल मानव जाति को सदियों, बल्कि हजारों साल से परेशान किए हुए है. जरूर सभी जानवरों का एक साझा इतिहास होगा. यही बात हम लोगों में उत्साह भरती है और इसे सुलझाने के लिए यहां का हर रिसर्चर जुनून की हद तक जाने को तैयार है."

स्पेनी वैज्ञानिक को इस क्रम में कुछ ऐसी प्रजातियां भी मिली हैं, जिनके बारे में पहले किसी को पता तक नहीं था. दो बार नोबेल पुरस्कार जीत चुके ईएमबीएल का मानना है कि अगर गुतिरेज की रिसर्च का तार्किक अंत निकला, तो जीवविज्ञान के क्षेत्र में क्रांति आ सकती है. तो क्या, उसके बाद रिसर्च पर विराम लग जाएगा, प्रोफेसर एरेंट कहते हैं कि काम बढ़ जाएगा, "हमारी रिसर्च का जो एजेंडा है, उसके तहत हम मस्तिष्क के हिस्सों के बारे में पूरी जानकारी हासिल करना चाहते हैं और मुझे नहीं लगता है कि इसके सवाल खत्म होने वाले हैं."

रिपोर्टः अनवर जे अशरफ

संपादनः ओंकार सिंह जनौटी

DW.COM