1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

मंदी से बाहर आया यूरोजोन

जर्मनी और फ्रांस की अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर साल के दूसरे हिस्से में यूरो जोन को डेढ़ साल पुरानी मंदी से बाहर निकाल लिया. हालांकि स्पेन और इटली जैसे देशों की हालत अब भी बेहद नाजुक है.

नए कारोबार और ग्राहकों की जेब से पैसे निकलवा कर 17 देशों के आर्थिक जोन की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने मंदी पर विजय पाई है. यूरोपीय संघ के आर्थिक और मौद्रिक मामलों के आयुक्त ऑली रेह्न ने बताया कि बुधवार को जारी आंकड़े यूरोजोन में 0.3 फीसदी का विकास दिखा रहे हैं जिसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था में दिख रहे विकास का आधार मजबूत है. हालांकि उन्होंने माना कि फिलहाल संतुष्ट होने जैसी स्थिति नहीं है और इस गति को बनाए रखना "नए राजनीतिक संकटों और बाजार की दिक्कतों से बचने पर निर्भर करेगा."

यूरोजोन को कर्ज संकट से जूझते हुए तीन साल से ज्यादा हो गए हैं. जर्मनी इस आर्थिक संघ का ऊर्जा केंद्र है. एक साल से कुछ ज्यादा समय में पहली बार इस साल की दूसरी तिमाही में इसने 0.7 फीसदी की दर से विकास किया. इसमें प्रमुख रूप से घरेलू निजी और सार्वजनिक उपभोग में बढ़ोत्तरी की भागीदारी रही है. उधर फ्रांस में विकास दर 0.5 फीसदी रही और 2011 की शुरूआत से मंदी की चपेट में आए देश ने पहली बार उससे पीछा छुड़ाया है. फ्रांस में उपभोक्ता खर्च और औद्योगिक उत्पादन बढ़ा है लेकिन निवेश इस दौर में भी नीचे ही गया है. साल की दूसरी तिमाही में फ्रांस और जर्मनी के विकास की अगर अमेरिका के 0.4 फीसदी विकास दर से तुलना करें तो दुनिया के मंदी से उबरने में इन देशों की अहमियत साफ हो जाती है.

यूरोजोन के दूसरे देशों में भी सुधार हुआ है. आर्थिक मदद लेने वाले पुर्तगाल की जीडीपी में इस तिमाही में 1.1 फीसदी का उछाल आया है जो बीते तीन सालों में सबसे ज्यादा है. भरपूर निर्यात और घटते निवेश की स्थिति में सुधार के दम पर विकास का यह आंकड़ा बना है. ऑस्ट्रिया और फिनलैंड की अर्थव्यवस्था ने भी विकास किया है. हालांकि कर्ज संकट झेल रहे देशों के साथ ही नीदरलैंड्स यूरोजोन के उन प्रमुख देशों में बना हुआ है जो अभी मंदी से बाहर नहीं आ सके हैं.

साइप्रस की अर्थव्यवस्था दूसरी तिमाही में 1.4 फीसदी सिकुड़ गई है. साइप्रस को मार्च में अंतरराष्ट्रीय राहत पैकेज मिला और इसका क्या नुकसान हो सकता है उसकी पहली झलक यहीं देखने को मिली. कई विश्लेषक और अर्थशास्त्री मान रहे हैं कि विकास की रफ्तार आने वाले वक्त में आसान होगी लेकिन एक स्वस्थ, टिकाऊ विकास दर 2015 के पहले आ पाएगी ऐसा नहीं लगता.

विकास का ऊबड़ खाबड़ रास्ता

यूरोजोन की समस्या है यह है कि कई सालों से दक्षिणी हिस्सा कर्ज में डूबा है. पुर्तगाल, इटली, स्पेन और ग्रीस की हालत काफी खराब है. इसी महीने की शुरूआत में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा कि स्पेन में सुधार कार्यक्रम, मौद्रिक उपाय और बाहरी असंतुलन पर लगाम का फल निकलेगा लेकिन सबसे पहले रोजगार पैदा करने और विकास को तेज करने की जरूरत है. स्पेन की अर्थव्यवस्था दूसरी तिमाही में 0.1 फीसदी सिमटी है, यह पहले से बेहतर है लेकिन अब भी सिमट ही रही है. ग्रीस के लिए यह लगातार छठा साल है जब उसकी अर्थव्यवस्था साल बीतने के साथ एक कुल मिला कर एक चौथाई सिमटी जा रही है. यूरोपीय संघ में खर्च कटौती के उपाय हालांकि लगातार बदल रहे हैं. नीति बनाने वाले घाटा और कर्ज घटाने के लिए लगातार उपाय ढूंढ रहे हैं. हालांकि इसके साथ ही अब ध्यान इस बात पर भी है कि यह उपाय विकास की राह में रोड़ा न बनें और रोजगार बढ़ाने में मदद करें.

उभरते यूरोप में चेक गणराज्य दूसरी तिमाही में मंदी से बाहर हो गया है. यूरोपीय संघ के दूसरे देशों में बड़ी पूर्वी अर्थव्यवस्थाएं बेहतर हुई हैं हालांकि ऐसे संकेत नहीं हैं कि परिस्थितियां मजबूती से पलट रही हैं. आंकड़े बता रहे हैं कि पिछली तिमाही की तुलना में चेक 0.7 फीसदी, हंगरी 0.1 फीसदी और पोलैंड 0.4 की विकास दर के साथ आगे बढ़ा है.

एनआर/ओएसजे (रॉयटर्स)

DW.COM

संबंधित सामग्री