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खबरें

मंडेला के 5 महत्वपूर्ण पल

मंडेला दुनिया भर के बेहतरीन राजनेताओं में शुमार किए जाते थे. रंगभेद के खिलाफ मंडेला ने लंबी लड़ाई लड़ी. मंडेला की जिंदगी से जुड़े कुछ अहम पल...

20 अप्रैल 1964: मंडेला ने प्रीटोरिया में सुनवाई के दौरान एक बयान दिया. जिससे पता चलता है कि रंगभेद को मिटाने के लिए उनका संकल्प कितना मजबूत था. गोरों के राज को खत्म करने के संघर्ष में वह अपनी जिंदगी भी कुर्बान करने को तैयार थे. उन्होंने कहा, "मैंने अपने जीवन को अफ्रीकी लोगों के संघर्ष के लिए समर्पित कर दिया है. मैंने श्वेतों के वर्चस्व के खिलाफ लड़ा और अश्वेतों के वर्चस्व के खिलाफ भी लड़ूंगा. मैंने एक लोकतांत्रिक और स्वतंत्र समाज के आदर्श को संजोया जहां सभी व्यक्ति सद्भाव और समान अवसर के साथ रहें. यह मेरे लिए एक उम्मीद और जीने का आदर्श है. लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो मैं इसके लिए मरने को भी तैयार हूं.'' दो महीने के बाद मंडेला समेत सात लोगों को उम्र कैद की सजा हुई.

11 फरवरी 1990: 27 साल जेल में बिताने के बाद 11 फरवरी 1990 को उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया. मंडेला को केप टाउन के पास विक्टर वर्स्टर जेल में रखा गया था. जेल से निकलते वक्त मंडेला अपनी पत्नी विनी मंडेला का हाथ पकड़े हुए थे. चेहरे पर मुस्कुराहट और अपनी मुट्ठी को आसमान की तरफ भींचे मंडेला ने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया. समर्थकों के लिए उनका जेल से बाहर आना अकल्पनीय था. लोग खुशी से पागल हो रहे थे. दुनिया भर से पत्रकार इस क्षण को अपने कैमरों में कैद करने के लिए बेताब दिखे. टेलीविजन के जरिए दुनिया ने मंडेला को जेल से बाहर आते देखा. भले ही लोग मंडेला को टीवी पर देख रहे थे लेकिन मानो उनके शरीर में बिजली दौड़ रही थी. लंबा अर्सा जेल में बिताने के कारण बहुत से लोगों को नहीं पता था कि अब मंडेला कैसे दिखते हैं. ना ही लोगों ने उनकी कोई ताजा तस्वीर देखी थी. इस स्वागत को देख मंडेला आश्चर्यचकित रह गए. उन्होंने लिखा, "जब मैं भीड़ के बीच था तो मैंने अपनी दाहिनी मुट्ठी उठाई और उस वक्त वहां बहुत शोर था. 27 सालों तक मैं ऐसा नहीं कर पाया था. जिससे मुझे शक्ति और खुशी दोनों का अहसास हुआ.'' मंडेला याद करते हैं, "जब मैं अंतिम बार उन गेटों के बीच से दूसरी तरफ कार में बैठने के लिए गया तो मुझे 71 साल की उम्र में ऐसा लगा कि मेरी जिंदगी नए सिरे से शुरू हो रही है."

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2010 विश्वकप के दौरान मंडेला

10 मई 1994: लोकतांत्रिक चुनावों के बाद नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति चुने गए. दक्षिण अफ्रीका की राजधानी प्रीटोरिया में जब मंडेला ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली तो उस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए दुनिया भर के नेता मौजूद थे. मंडेला के राष्ट्रपति बनने के बाद पूरे अफ्रीका में जश्न का माहौल था. अपने भाषण के अंत में मंडेला ने कहा था, "कभी नहीं, कभी नहीं और कभी नहीं यह खूबसूरत धरती कभी दूसरों के उत्पीड़न को अनुभव करेगी. अब स्वतंत्रता का राज होगा. मानवता के इससे बेहतर उपलब्धि के मौके पर सूरज कभी नहीं डूबेगा. ईश्वर अफ्रीका को आशीर्वाद दे. शुक्रिया."

24 जून 1995: जोहानिसबर्ग में रग्बी के विश्वकप फाइनल मुकाबले के दौरान मंडेला अनोखे अंदाज में नजर आए. अफ्रीकी टीम की जर्सी पहने मंडेला को देख स्टेडियम में मौजूद 60,000 दर्शकों को झूमने का मौका मिल गया. दर्शक ''नेल्सन, नेल्सन, नेल्सन'' के नारे लगाने लगे. थोड़ी देर बाद घरेलू टीम को मंडेला ने बधाई दी जो नस्ली सुलह का प्रतीक बना.

11 जुलाई 2010: मुस्कुराते हुए मंडेला ने विश्वकप फुटबॉल के समापन समारोह में दर्शकों की तरफ हाथ हिलाते हुए अभिवादन स्वीकार किया. विश्वकप के आयोजन ने दक्षिण अफ्रीका को दुनिया भर में अलग पहचान बनाने का मौका दिया. मंडेला उस दौरान कमजोर नजर आए. सार्वजनिक तौर पर मंडेला आखिरी बार दिखे.

एए/एजेए (एपी)

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