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दुनिया

मंडेला की याद में जुटी दुनिया

सोवेतो के वर्ल्ड कप स्टेडियम में दुख, याद, फख्र और गौरव का मिलन हो रहा है..

इस स्टेडियम में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा सहित दुनिया भर के लगभग 100 नेता जमा हो रहे हैं. इसके अलावा करीब 80,000 लोग इस ऐतिहासिक लम्हे के साक्षी बनने वाले हैं. वे ऐसी शख्सियत को याद करने वाले हैं, जो सभी सीमाओं से आगे निकल चुकी थी.

हालांकि गुरुवार को मंडेला के निधन के बाद दक्षिण अफ्रीका ने "सबसे बड़े दुख" का एलान किया. लेकिन लोगों ने नाच गा कर उनके महान जीवन का जश्न भी मनाया. जोहानिसबर्ग में स्पोर्ट्स अकादमी चलाने वाले शाहिम इस्माइल ने कहा, "वह ईश्वर की देन थे. ईश्वर ने उन्हें वापस ले लिया." इस्माइल ने मेमोरियल सर्विस में हिस्सा लेने के लिए एक दिन की छुट्टी ले ली है.

Nelson Mandela mit Winnie Mandela 13.02.1990 Soweto Fußballstadion

1990 में सोवेतो स्टेडियम में मंडेला

पहले आओ, पहले पाओ

स्टेडियम में कोई रिजर्वेशन नहीं है. पहले आने वाले को जगह मिलेगी. इसे देखते हुए पौ फटने से पहले ही लोगों का हुजूम लग गया. गेट खुलते ही वे खाली सीटों की ओर भागे, ताकि मंडेला का आखिरी दीदार हो पाए.

पीले और हरे रंग के दक्षिण अफ्रीकी झंडे में लिपटे लोग "मंडेला - सदा के लिए" के नारे लगाते दिखे और उनके पांव थिरकते दिखे. 36 साल की नोमा कोवा का कहना है, "यह आपके जीवन में एक ही बार आ सकता है. यह इतिहास है. मैं इसे टीवी पर नहीं देखना चाहती थी."

जोहानिसबर्ग में मंडेला के गुजरने की खबर के बाद पूरी दुनिया में एक स्वर से उनकी महानता की आवाज आ रही है. हाल के दिनों में शायद ही किसी दूसरी घटना ने लोगों को इस तरह बांधा होगा.

हर जगह के लोग

मंडेला मेमोरियल में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और क्यूबा के राष्ट्रपति राउल कास्त्रो एक पांत में बैठेंगे. भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और ब्राजाली राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ भी मौजूद होंगी. दुनिया के अलग अलग हिस्सों से जमा ये नेता मंडेला की लोकप्रियता की निशानी होंगे. ओबामा के साथ उनकी पत्नी मिशेल ओबामा, पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और उनकी पत्नी लॉरा बुश भी दक्षिण अफ्रीका पहुंच रही हैं. दो दूसरे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और जिमी कार्टर भी आ रहे हैं.

इस मेमोरियल के बाद चार दिनों तक कार्यक्रम चलेंगे और रविवार को मंडेला को उनके पुश्तैनी गांव कुनू में दफना दिया जाएगा. उन्होंने अपने बचपन के दिन इसी गांव में बिताए.

Nelson Mandela Zeremonie Beisetzung Stadion Junge Plakat

इतिहास देखने पहुंचे लोग

सोवेतो स्टेडियम में इस कार्यक्रम के मद्देनजर सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है. आसमान में हेलिकॉप्टर गश्त लगा रहे हैं, जबकि मार्शल लोगों की भीड़ पर नियंत्रण के लिए पुलिस की मदद कर रहे हैं.

हालांकि 95 साल के मंडेला लंबे वक्त से बीमार चल रहे थे लेकिन उनकी मौत की खबर के बाद पूरा राष्ट्र हिल गया. दक्षिण अफ्रीका ने सिर्फ दो दशक पहले रंगभेद से निजात पाया है. मंडेला लगभग एक दशक से सार्वजनिक जीवन से दूर थे लेकिन देश के लोग उन्हें अपना "पिता" मानते थे और उनकी तरफ उम्मीद भरी नजर से देखते रहे.

जादूगर मंडेला

मेमोरियल से एक शाम पहले दक्षिण अफ्रीका के नोबेल पुरस्कार विजेता डेसमंड टूटू ने उन्हें "जादूगर" बताया, जिसने गृह युद्ध के दरवाजे पर पहुंच चुके देश को एक सूत्र में पिरोया. उन्होंने कहा, "हर कोई कह रहा था कि हम खाक हो जाएंगे. वह निश्चित तौर पर एक जादूगर थे, जिनके पास जादू की छड़ी थी, जिसने इंद्रधनुषी लोगों को एक साथ किया." अलग अलग जाति और नस्ल के लोगों की वजह से दक्षिण अफ्रीका को रेनबो कंट्री यानी इंद्रधनुषी देश भी कहते हैं.

एजेए/ओएसजे (एएफपी)

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