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विज्ञान

मंगल की मिट्टी से नया कंक्रीट

शिकागो की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने मंगल ग्रह पर इंसान के जीवन के सपने को सच करने की तरफ एक और कदम बढ़ाया है. उन्होंने तैयार किया है एक खास कंक्रीट.

रिसर्चरों ने मंगल पर मौजूद पदार्थों से कंक्रीट जैसी संरचना बनाई है. वैज्ञानिकों के साथ साथ आम लोगों की भी मंगल में दिलचस्पी बढ़ रही है. मार्स वन प्रोजेक्ट के तहत मानव सभ्यता को पृथ्वी के पड़ोसी ग्रह मंगल पर बसाने की योजना है. ऐसा करने में सामने आने वाली चुनौतियों का भी वैज्ञानिकों को अंदाजा है. इनमें से एक चुनौती है इमारतें बनाना जिनमें वहां जाने वाले रह सकें और काम कर सकें.

रिसर्च साइंटिस्ट लिन वैन, गियांकुला कुसाटिस और रोमन वेंडनर ने इसका एक संभव हल खोज निकाला है. मंगल पर प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली सामग्री, सल्फर और मिट्टी से वे कंक्रीट जैसा पदार्थ बनाने में कामयाब हो सके हैं. उन्होंने इसके लिए सल्फर को उच्च तापमान तक गर्म किया ताकि वह तरल रूप में आ जाए. उसके बाद इसे मंगल की मिट्टी के साथ मिलाया. तैयार हुआ पदार्थ पारंपरिक कंक्रीट से हट कर मंगल कंक्रीट है. इसके लिए पानी की आवश्यक्ता नहीं, जो कि मंगल पर दुर्लभ है.

कंक्रीट की खूबियां

सल्फर आधारित कंक्रीट नया आयडिया नहीं है, इससे जुड़ी कुछ चुनौतियां भी रही हैं. पृथ्वी की वरायटी की सल्फर कंक्रीट ठंडी करने पर सिकुड़ती है. इसमें खोखले स्थान बन जाते थे जिससे संरचना कमजोर होती है. लेकिन नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पाया कि यदि मंगल की मिट्टी और सल्फर की बराबर मात्रा ली जाए को मंगल की परिस्थितियों के लिए सटीक कंक्रीट तैयार की जा सकती है.

उन्होंने पाया कि मंगल की मिट्टी सल्फर के साथ अच्छी तरह खुद को बांध लेती है. वैन ने डीडब्ल्यू को बताया, "मंगल पर गुरुत्व, वायुमंडलीय दबाव और तापमान इत्यादि वातावरण संबंधी कारकों को ध्यान में रखते हुए, सल्फर आधारित कंक्रीट का निर्माण वैज्ञानिक रूप से अच्छा उपाय है. हालांकि मिट्टी में सल्फर की इतनी ज्यादा मात्रा मिलाने की जरूरत पर हम हैरान थे."

परिणामस्वरूप तैयार होने वाली कंक्रीट पारंपरिक कंक्रीट से कहीं ज्यादा मजबूत है. शायद सल्फर और मंगल की मिट्टी के बीच मजबूत जुड़ाव की वजह से. इसे 100 फीसद रूप से रीसाइकिल किया जा सकता है, क्योंकि सल्फर को पिघलाकर दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है.

उपयोगी खोज

इस रिसर्च की शुरुआत चंद्रमा के कंक्रीट शोध के तौर पर हुई थी. हालांकि डॉक्टर वैन के मुताबिक उनकी टीम को दिक्कत यह आई कि निर्वात के निकट वातावरण में सल्फर गैस में परिवर्तित हो जाती है. इसलिए वैज्ञानिकों ने तय किया कि मंगल का कंक्रीट बेहतर विकल्प होगा. उन्होंने बताया कि मंगल पर चंद्रमा के मुकाबले वायुमंडलीय दबाव कहीं ज्यादा है.

वैन के मुताबिक अगला कदम मंगल की कंक्रीट को 3डी तकनीक के साथ मिलाकर देखना होना चाहिए. लेकिन योजना को अंजाम देने में अभी एक साल का समय है. इस बीच शोध को रिव्यू के लिए जमा किया गया है. मंगल का कंक्रीट कितना टिकाऊ होगा और इसपर कितना निर्भर किया जा सकता है, इस पर और शोध जरूरी है.

एवा वुटके/एसएफ

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