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ब्लॉग

भ्रष्टाचार पर विपक्ष के घेरे में भाजपा

एक घोटाला और उस घोटाले से जुड़े लोगों की एक के बाद एक असामयिक मौत. मामला रहस्यमयी कहानी का लगता है, लेकिन मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले में यही हो रहा है.

देश में फैले भ्रष्टाचार की एक बहुत बड़ी मिसाल मध्य प्रदेश का व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाला है जिसके कारण लगभग डेढ़ हजार लोग जेल में हैं और कुछ फरार हैं. इस घोटाले की जांच मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) दी देखरेख में राज्य सरकार का विशेष कार्य बल (एसटीएफ) कर रहा है. मध्य प्रदेश के प्रमुख हिन्दी दैनिक ‘नई दुनिया' के अनुसार अब तक इस घोटाले से जुड़े 43 आरोपियों और गवाहों की मृत्यु हो चुकी है. पिछले दो दिनों में एक आरोपी की इंदौर जेल में मृत्यु हो गई और दूसरे की ग्वालियर के एक अस्पताल में. यह व्यक्ति जमानत पर जेल से बाहर था. दोनों की मृत्यु अचानक हुई है.

इस घोटाले को उछाल कर राज्य का प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस लगातार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेरने की कोशिश करता रहा है लेकिन चौहान और उनकी सरकार ने किसी भी मंत्री या भारतीय जनता पार्टी के नेता के घोटाले में शामिल होने से इंकार किया है. लेकिन अब लगता है कि कांग्रेस बेहद आक्रामक मूड में आ गई है और भारतीय जनता पार्टी के साथ टकराव के आसार बनते नजर आ रहे हैं. उसे लग रहा है कि अगले विधानसभा चुनाव में वह फिर से जीत सकती है क्योंकि मध्य प्रदेश में भाजपा 2003 से सत्ता में है और कांग्रेस उसके शासन काल की कमियों और घोटालों को प्रचारित करके उसके खिलाफ हवा बनाने में सफल हो सकती है. व्यापमं घोटाला इसमें काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पिछले वर्ष इस घोटाले से संबंधित 180 पृष्ठों के दस्तावेज़ जारी किए थे. उनकी मांग पर ही मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एसआईटी का गठन करके उसे एसटीएफ द्वारा की जा रही जांच का मार्गदर्शन करने की ज़िम्मेदारी दी थी. कांग्रेस लगातार इस घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराये जाने की मांग कर रही है लेकिन राज्य सरकार इसके लिए राजी नहीं. आज भी गृहमंत्री बाबूलाल गौर ने पत्रकारों से बात करते हुए इस मांग को खारिज कर दिया.

कांग्रेस का आरोप है कि आरोपियों और गवाहों की इतनी बड़ी संख्या में लगातार हो रही मौतें एक साजिश का नतीजा है जबकि भाजपा और राज्य सरकार उन्हें स्वाभाविक बता रही है. आज गौर ने एक विवादास्पद बयान देकर अपनी संवेदनहीनता का परिचय दिया और विपक्ष इसे भी विरोध का मुद्दा बना रहा है. गौर ने कहा: “जो आया है, वह जाएगा ही. लोग रेल में भी मरते हैं और जेल में भी और बाहर भी.” लेकिन दिग्विजय सिंह ने इस सभी मौतों को संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौतें बताकर कहा है कि कांग्रेस इस घोटाले के मुद्दे पर आंदोलन छेड़ेगी. उन्होंने एसआईटी और एसटीएफ, दोनों में अविश्वास प्रकट करते हुए कहा कि इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा.

इस बात में कोई शक नहीं कि किसी घोटाले से जुड़े 43 व्यक्तियों की मृत्यु हो जाना कोई साधारण घटना नहीं है और मध्य प्रदेश सरकार के लिए जनता को यह समझाना आसान नहीं होगा कि ये सभी स्वाभाविक मौतें थी. सीबीआई की जांच की मांग को ठुकरा कर भी वह संदेह की सुई अपनी ओर मोड़ रही है. सीबीआई की स्थापना ही मुख्यतः भ्रष्टाचारनिरोधक जांच एजेंसी के तौर पर की गई थी. व्यापमं घोटाला के विस्तार को देखते हुए विपक्ष की यह मांग पूरी तरह जायज है कि इसकी जांच सीबीआई से कराई जाए. कांग्रेस इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर लड़ाई लड़ने की योजना बना रही है. आने वाले दिनों में उसके तेवर और भी अधिक आक्रामक होंगे. इस समय केंद्र सरकार में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी विवाद में घिरी हैं और मीडिया तथा विपक्ष के हमले झेल रही हैं. इससे “भ्रष्टाचार-मुक्त भारत” के भाजपा के चुनावी वादे पर बहुत बड़ा सवालिया निशान लगने लगा है.

ब्लॉग: कुलदीप कुमार

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