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दुनिया

भोपाल गैस पीड़ितों को 71 करोड़ और

भारत सरकार ने 1984 के भोपाल गैस कांड पीड़ितों के लिए 71.28 करोड़ अतिरिक्त रुपयों के मुआवजे को मंजूरी दे दी है. पीड़ितों को उनके शारीरिक हालात के मुताबिक एक से लेकर पांच लाख रुपए तक दिए जाएंगे.

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केंद्रीय मंत्रीमंडल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की प्रमुखता में एक बैठक के दौरान मंत्री समूह के प्रस्तावों को मंजूरी दी. प्रस्ताव के पारित होने के बाद अब उन 1,703 पीड़ितों को पांच लाख रुपये की अतिरिक्त रकम दी जाएगी जो स्थायी रूप से विकलांग हो गए थे. लगभग 1,800 अस्थायी रूप से विकलांग लोगों को एक एक लाख रुपया दिया जाएगा. पहले तय किए गए मुआवजे को देने के बाद यह अतिरिक्त रकम दी जाएगी.

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पीड़ितों में से 42 व्यक्तियों को 'बुरी तरह से घायल' श्रेणी में रखा गया है. शुरुआती रकम चुकाए जाने के बाद इन्हें भी पांच लाख रुपये दिए जाएंगे. इस साल जून में सरकार ने पीड़ितों के लिए 669 करोड़ रुपयों का एलान किया था. मंत्रीसमूह का इस साल मई में गठन किया गया था. जीओएम ने भोपाल कांड से संबंधित सारे मामलों की तहकीकात की और पीड़ितों और उनके परिवारों के पुनर्स्थापन और इलाज के लिए प्रस्ताव पेश किए.

भोपाल में 1984 को यूनियन कार्बाइड प्लांट में मिथाइल आइसोसायानेट गैस के लीक होने से हजारों लोगों की मौत हो गई थी. कई सालों बाद भी जहरीली गैसों से भरी हवा में सांस ले रहे लोग फेफड़ों की बीमारियों का शिकार होते रहे हैं. कई गर्भवती महिलाओं के बच्चे भी विकलांग पैदा हुए. त्रासदी होते ही कुछ दिनों बाद आसपास के पेड़ों के पत्ते झड़ गए और हजारों जानवरों की मौत हो गई थी. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के प्रदूषण का असर कई सालों से चल रहा है. भूमिगत पानी के दूषित होने से उसे पीने वाले लोगों को आज भी बीमारियां हो सकती हैं.

भारत सरकार के मुताबिक भोपाल त्रासदी में 3,500 लोग मारे गए थे. लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि गैस से 25,000 लोग मौत का शिकार हुए और गैस का बुरा असर त्रासदी के दो दशकों बाद भी देखा जा सकता है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एमजी

संपादनः वी कुमार

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