1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

भूमध्य सागर में फेरी दुर्घटना

इस दशक की सबसे जानलेवा फेरी दुर्घटना में इस बार भूमध्य सागर में करीब 400 लोगों के डूब कर जान गंवाने की आशंका है. वहीं दूसरी ओर 16 अप्रैल 2014 को हुई दक्षिण कोरिया की फेरी दुर्घटना को आज एक साल हो गया.

आंकड़े बताते हैं कि पिछले दस साल में हर साल 500 से ज्यादा लोग इन्हीं दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं. बीते कुछ सालों से अफ्रीका और मध्यपूर्व के संकटग्रस्त इलाकों से यूरोप आने वालों की संख्या काफी बढ़ गई है. यूएन रेफ्यूजी एजेंसी ने सोमवार को भूमध्य सागर में डूबने से हुई इतनी बड़ी संख्या में मौतों पर चिंता जताते हुए कहा है कि इस दिशा में यूरोपीय सरकारों को बचाव और राहत की कोशिशों को और तेज करने की जरूरत है.

इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ माइग्रेशन कह चुकी है कि स्थिति "संकट के स्तर" पर पहुंच चुकी है. यूएन हाई कमिशनर फॉर रिफ्यूजी आंतोनियो गुटेरेस ने कहा कि यह दुनिया भर के रिफ्यूजी और प्रवासियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले चार प्रमुख रूटों में से "सबसे खतरनाक बन कर उभरा" है. गुटेरेस ने बताया कि केवल पिछले ही साल में इस रास्ते से करीब दो लाख 19 हजार लोगों ने यात्रा की.

इस दुर्घटना से बच निकले कुछ लोगों ने यूएन रिफ्यूजी एजेंसी से बातचीत में बताया कि लीबिया के तटीय क्षेत्र में डूबी इस फेरी में कई सौ लोग सवार थे जो यूरोप की ओर आ रहे थे. गर्मियों में इस तरह की दुर्घटना में मरने वालों की संख्या और बढ़ने की आशंका है क्योंकि तब और भी ज्यादा लोग इस रास्ते से यात्रा करते हैं.

यूएनएचआरसी का अनुमान है कि पिछले साल भूमध्य सागर के रास्ते यूरोप पहुंचने की कोशिश करने वालों में करीब 3,500 लोगों की मौत हो गई. 2013 में यह संख्या 600 के आसपास थी. इनमें से भी केवल कुछ ही शव बरामद किए जाने के कारण कई मौतों को आधिकारिक रूप से घोषित भी नहीं किया गया. यूएनएचआरसी के आंकड़ों के अनुसार, 2015 में अब तक समुद्र के रास्ते में मारे गए या गायब हुए लोगों की संख्या 900 तक पहुंच चुकी है.

पिछले केवल एक हफ्ते के अंदर ही गरीबी और समस्याग्रस्त इलाकों से किसी तरह बच कर निकले 10,000 से भी अधिक शरणार्थियों के ईयू में प्रवेश करने की संभावना जताई गई है. यूरोपीय संघ के देशों की मुश्किल यह है कि भूमध्य सागर के रास्ते यूरोप पहुंच रहे शरणार्थियों की बढ़ती तादाद से कैसे निबटें. इस बारे में अभी तक कोई आपातकालीन ईयू बैठक नहीं हुई है.

आरआर/एसएफ (एपी)

DW.COM