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दुनिया

भूखे रहने पर हुआ कोर्ट मार्शल रद्द

भूखे रहने पर गई फौजी की नौकरी 15 साल बाद वापस मिली. भारतीय सेना के जवान का कोर्ट मार्शल आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल ने किया रद्द.

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सिग्नलमैन रामकुमार मौर्या को सीनियर के नाफरमानी की सज़ा नौकरी से हाथ गंवा कर चुकानी पड़ी.1995 में अनुशासनहीनता के आरोप में 28 दिन की जेल की सज़ा मिली तो रामकुमार ने खाना खाने से इंकार कर दिया. उस वक्त रामकुमार की पोस्टिंग मथुरा में थी. कमांडिंग ऑफिसर ने इसे नाफरमानी करार देकर को कोर्ट मार्शल कर दिया. अब मौर्या की अपील पर सुनवाई करते हुए आर्म्ड फोर्सेज़ ट्रिब्यूनल ने इसे अनुचित माना है और सज़ा समेत कोर्ट मार्शल को भी रद्द कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि जब तक रामकुमार पेंशन पाने के हकदार नहीं हो जाते तब तक उन्हें नौकरी में रखा जाए.

कोर्ट में रामकुमार की दलील थी कि भोजन करना उनकी व्यक्तिगत आज़ादी के दायरे में आता है. कब भोजन करना है और कब नहीं इसका फैसला सिर्फ वही कर सकते हैं. उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत, गैरकानूनी और बेबुनियाद थे. रामकुमार का कहना है कि उनके खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई इसलिए भी गलत थी क्योंकि उस वक्त वो बीमार थे. रामकुमार तब मानसिक बीमारी से परेशान थे औऱ कानूनन ऐसे जवान का कोर्ट मार्शल नहीं किया जा सकता.

दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए पहुंचने के बाद पिछले साल ही इस मामले को ट्रिब्यूनल के पास भेजा गया.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ एन रंजन

संपादन: आभा मोंढे

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