भुखमरी से लड़ाई का बिल पास | दुनिया | DW | 03.09.2013
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दुनिया

भुखमरी से लड़ाई का बिल पास

जिस देश में 1970 से ही गरीबी हटाओ का नारा दिया जा रहा है, वहां 2013 में ये मान लिया गया कि दो तिहाई जनता राशन खरीदने में भी समर्थ नहीं हैं. सस्ता राशन बांटने के लिए मंगलवार को राज्य सभा ने खाद्य सुरक्षा बिल पास कर दिया.

लोक सभा में यह बिल पहले ही पास हो गया था. अब सिर्फ राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की देरी है, जिसके बाद यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा. सोमवार को राज्य सभा में देर रात तक चली बहस में विपक्ष द्वारा इस बात की आलोचना हुई कि यह बिल चुनाव में अपनी स्थिति बेहतर करने के लिए जल्दबाजी में लाया जा रहा है. विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि इस तरह की योजनाएं पहले से ही मौजूद हैं लेकिन उन्हें दोबारा नए ढंग से पेश किया जा रहा है.

कितना फायदा

योजना को लागू करने में 1300 अरब रुपये का खर्च आएगा. खाद्य सुरक्षा विधेयक में देश की करीब 82 करोड़ आबादी को सस्ती दरों में अनाज दिलाने का प्रावधान है. फिलहाल तीन रुपये प्रति किलो चावल, दो रुपये प्रति किलो गेहूं और एक रुपया प्रति किलो ज्वार, दाम निर्धारित किए गए हैं. दाम तीन साल बाद बदले जाएंगे. खाद्य सुरक्षा विधेयक से गांवों की 75 फीसदी और 50 फीसदी शहरी आबादी को पांच किलो सस्ता अनाज हर महीने मुहैया होगा. इस श्रेणी में आने वाले हर व्यक्ति को महीने में पांच किलो राशन मिलेगा.

अगर राज्य सरकार अनाज मुहैया न करा पाए तो ऐसी स्थिति में उसे खाद्य सुरक्षा भत्ता देना होगा. यह भत्ता कितना होगा, यह केन्द्र सरकार तय करेगी. खाद्यान्न में कमी की स्थिति में केन्द्र सरकार राज्य को मदद करेगी. राज्यों की निजी वितरण प्रणाली को भी पुनर्नियोजित किया जाएगा.

दुनिया भर के बाल कुपोषण और गर्भवती महिलाओं की मृत्यु के मामलों में भारत का बेहद बुरा रिकॉर्ड है. भारत में भुखमरी खत्म करने की दिशा में यूपीए सरकार की यह योजना एक अहम कदम के तौर पर देखी जा रही है. प्रत्येक गर्भवती महिला को 6 हजार रुपये दिए जाने का भी प्रावधान रखा गया है. साथ ही 6 महीने से 14 साल तक के बच्चों को राशन मुहैया कराया जाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी. परिवार की सबसे उम्रदराज महिला मुखिया होगी और उसी के नाम पर राशन कार्ड होगा.

भारत में मई 2014 में लोकसभा चुनाव होने हैं, उससे पहले खाद्य सुरक्षा विधेयक को लाना विपक्ष की नजर में कांग्रेस का पैंतरा है. पिछले दिनों बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी ने कहा भी था, "यह फूड सिक्योरिटी बिल नहीं, वोट सिक्योरिटी बिल है." राज्य सभा में 11 घंटे तक चली बहस में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि राज्यों को भी इस योजना का फायदा मिलना चाहिए. हालांकि रुपये की खराब हालत के चलते सरकार पर इस योजना का बोझ बहुत भारी हो सकता है.

एसएफ/ओएसजे (डीपीए)

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