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दुनिया

भीड़तंत्र के खिलाफ भारतीय लोकतंत्र का विरोध प्रदर्शन

भारत में आये दिन सामने आ रही मॉब लिंचिंग की वारदातों के खिलाफ अब भारतीय नागरिक सड़कों पर उतर रहे हैं. देश के कई शहरों में 28 जून के दिन एक साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है जिसमें लोग बर्बर भीड़तंत्र के खिलाफ आवाज उठाएंगे.

'नॉट इन माइ नेम' - यह नारा भारत के लोगों को भी साथ लाने जा रहा है. 2015 में प्रमुखता से उभरा यह नारा लंदन स्थित ऐक्टिव चेंज फाउंडेशन ने लोकप्रिय बनाया था. आतंकी गुट आइसिस के खिलाफ तब ब्रिटिश मुसलमान सड़कों पर उतरे थे. इस बार भारत के कई शहरों में लोग विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं.

इसकी शुरुआत हुई एक फिल्म निर्माता सबा दीवान के फेसबुक पोस्ट से. दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद, तिरुअनंतपुरम, बेंगलूरू के अलावा कई और शहरों में लोग सड़कों पर मार्च निकालेंगे. सबा दीवान ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है कि भारत के बाहर भी लंदन, बॉस्टन, टोरंटो में लोगों ने उनसे संपर्क किया है और वहां भी ऐसी रैली निकालने की बात कही है. दीवान इसे उन सब लोगों का अभियान बताती हैं जो सभी नागरिकों की बराबरी, मानव गरिमा, समग्रता और शालीनता में विश्वास रखते हैं. वे इसे दलितों, अल्पसंख्यकों और दूसरे उपेक्षित समूहों के साथ हो रही सुनियोजित हिंसा के खिलाफ नागरिक अभियान बताती हैं.

16 साल के जुनैद की एक ट्रेन में की गयी हत्या सबसे ताजा मामला है, जिसका परिवार भी इस प्रदर्शन में शामिल होगा. पहले शांतिपूर्ण मार्च निकालने के विचार को आगे बढ़ाते हुए अब उसमें कविताओं और संगीत को भी शामिल किये जाने की योजना है, लेकिन कोई भाषण नहीं होगा. समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में दीवान ने बताया कि मकसद संविधान का पालन करना और मूल नागरिक अधिकारों पर "हमलों का विरोध" करना है. ग्रैफिक कलाकार ओरिजित सेन के बनाये इस अभियान के पोस्टर को भी सोशल मीडिया पर अब तक हजारों बार शेयर किया जा चुका है. बीते दो सालों की ऐसी कई हिंसक वारदातों में तथाकथित गौरक्षकों का हाथ रहा है, जो तमाम कारण गिनाते हुए कानून को अपने हाथों में लेने को सही ठहराते आये हैं. 

भारत के कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जुनैद हत्या कांड पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे "अत्यंत दुखदायी और शर्मनाक" बताया है. उन्होंने कहा कि इस घटना की जांच चल रही है और यह भी दोहराया कि सरकार ऐसे हमले बर्दाश्त नहीं करेगी. प्रसाद ने कहा, यह "साफ है कि जो भी हिंसा करेगा, उस पर कानून अपनी कार्रवाई करेगा. कोई हत्या करेगा तो कानून बहुत सख्त है और उसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा मिलेगी. ईमानदारी से कानून का पालन किये जाने की जरूरत है." उन्होंने हाल ही में जम्मू कश्मीर में एक वरिष्ठ भारतीय पुलिस अधिकारी की भीड़ के हमले में मारे जाने की भी निंदा की. 

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