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दुनिया

भाषा से बंटी यूक्रेनी राजनीति

महीनों से राजनैतिक संकट में उलझे यूक्रेन में भाषा की एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका उभर कर आई है. रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने रूसी भाषा बोलने वालों को बचाने के नाम पर ही क्रीमिया में अपनी सेना तैनात करने को सही ठहराया.

परंपरागत रूप से यूक्रेन के पश्चिमी भाग और राजधानी कीव में यूक्रेनी भाषा बोलने वाले लोगों की अधिकता रही है. जबकि रूस के ज्यादा करीब स्थित देश के पूर्वी और दक्षिणी भाग और खासतौर पर क्रीमिया में रूसी भाषा बोलने वाले ज्यादा लोग हैं. लेकिन यह भी सच है कि ज्यादातर यूक्रेनी बहुत आसानी से दोनों ही भाषाएं इस्तेमाल करते हैं. अब जबकि रूस ने क्रीमिया में घुसपैठ कर रखी है और दूसरी ओर कीव में यूरोप समर्थकों की अंतरिम सरकार बन गई है, विश्लेषकों का मानना है कि इससे पहले यूक्रेन में भाषा को लेकर इतनी राजनीति पहले कभी नहीं हुई.

भाषा की राजनीति

यूक्रेन की समाजशास्त्री इरीना बेकेश्किना कहती हैं, "राजनीति में भाषा का इस्तेमाल एक तरह का इशारा है, इससे पता चलता है कि कोई हमारे साथ है या हमारे खिलाफ." क्रीमिया विवाद शुरू होने के बाद से यूक्रेन के बहुत से लोग रूसी भाषा बोलने से इंकार करने लगे हैं.

जब से रूसी संसद ने पुतिन को यूक्रेन में सेना भेजने की अनुमति दी है तब से कीव के बहुत से नागरिकों ने सिर्फ यूक्रेनी भाषा बोलना शुरू कर दिया है. क्रेमलिन के इस तरह यूक्रेन में घुसने के खिलाफ यह यूक्रेनी लोगों का विरोध जताने का एक तरीका था. यूक्रेन के अपदस्थ राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच के क्षेत्रीय दल के लोग आम तौर पर रूसी भाषा बोलने वाले हैं. जबकि पूर्व प्रधानमंत्री और अब प्रमुख विपक्षी नेता यूलिया टिमोशेंको यूं तो धाराप्रवाह रूसी बोलती हैं, लेकिन रूसी पत्रकारों के साथ भी रूसी भाषा बोलने को तैयार नहीं होती. पिछले महीने यूक्रेन की राष्ट्रवादी स्वाबोदा पार्टी के नेता ओलेग तियाग्निबोक ने तो एक रूसी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान एक दुभाषिए का इस्तेमाल किया.

वहीं दूसरी ओर जरूरत पड़ने पर यही नेता भाषा की ये सीमाएं अपने फायदे के लिए लांघ भी जाते हैं. यानुकोविच देश के पूर्वी भाग से आते हैं जहां ज्यादातर लोग रूसी भाषा बोलते हैं. लेकिन 2010 में राष्ट्रपति चुने जाने पर उन्होंने खुद देश की राष्ट्रीय भाषा यूक्रेनी सीखने का फैसला किया.

स्कूल में भाषा की नींव

रूसी और यूक्रेनी दोनों पूर्वी स्लाविक भाषाएं हैं. इन भाषाओं के व्याकरण और बहुत सारे शब्दों और अक्षरों में समानता के बावजूद कई मायनों में ये बहुत अलग भी हैं. इस तरह दोनों भाषाएं सीखे बिना आसानी से समझ में आने लायक नहीं है. यूक्रेनी भाषा बोलने वाले बताते हैं कि उनकी भाषा रूसी से ज्यादा पोलिश भाषा के करीब है.

जब रूसी सोवियत संघ की आधिकारिक भाषा हुआ करती थी, तब भी यूक्रेनी भाषा यहां स्कूलों में पढ़ाई जाती थी. मकसद था कि हर यूक्रेनी रूसी भाषा में लिख पढ़ सके भले ही वह घर पर यूक्रेनी बोलता हो. कई स्टडीज बताती हैं कि यूक्रेन में यूक्रेनी भाषा न समझने वाले लोग महज एक फीसदी हैं जबकि 30 फीसदी ऐसे है जो इसे बहुत अच्छी तरह बोल नहीं सकते. बेकेश्किना बताती हैं कि बिल्कुल यही आंकड़े रूसी भाषा पर भी लागू होते हैं. 2001 में हुए जनमत सर्वेक्षण में पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्र के कुछ इलाकों में बहुमत लोगों ने यूक्रेनी भाषा को अपनी मातृभाषा बताया था. द्नीप्रोपेत्रोव्स्क में उनकी तादाद 67 फीसदी और खारकीव में 54 फीसदी थी.

हाल के भाषाई विवाद के पीछे एक मुद्दा यह भी है कि यूक्रेन की नई सरकार ने पिछले महीने 2010 के एक कानून को रद्द करने का फैसला किया जिसमें यूक्रेन के कुछ हिस्सों में रूसी भाषा को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया था. इस कानून को रूस समर्थक माने जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच ने पास करवाया था. हालांकि बाद में इस कानून नहीं बदला गया लेकिन इसे ही विवाद का कारण बताया जा रहा है. रूस ने यूक्रेन के इस कदम की निंदा की और इसे रूसी लोगों के मानवीय अधिकारों का हनन बताया. इसी का इस्तेमाल कर पुतिन ने ये दलील भी दे डाली कि "रूसी भाषा बोलने वाली जनता के हितों की रक्षा करने" के लिए रूस को यूक्रेन में अपनी सेना भेजना जरूरी है.

आरआर/एमजे (एएफपी)

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