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दुनिया

"भावनाओं के इतिहास" को साहित्य का नोबेल

बेलारूस की महिला पत्रकार स्वेतलाना अलेक्सिएविच को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला है. यह पहला मौका है जब किसी पत्रकार को नोबेल पुरस्कार मिला है.

स्वेतलाना अलेक्सिएविच के नाम का एलान करते हुए नोबेल पुरस्कार समिति ने कहा कि साहित्य का नोबेल "विविधता से भरे लेखन, पीड़ा के स्मारक और हमारे समय में साहस" को दिया जा रहा है. 67 साल की अलेक्सिएविच साहित्य का नोबेल पुरस्कार पाने वाली 14वीं महिला हैं. इस पुरस्कार के लिए इस साल 198 लोगों को नामांकित किया गया था.

अलेक्सिएविच के काम पर रोशनी डालते हुए स्टॉकहोम में स्वीडिश अकादमी की सचिव सैरा डैनियुस ने कहा, "बीते 30 या 40 साल से वह सोवियत और सोवियत काल के बाद कुछ लोगों के बारे में जानकारी जुटाने में व्यस्त रहीं. यह कोई ऐतिहासिक घटनाएं नहीं हैं. यह भावनाओं का इतिहास है."

अलेक्सिएविच यूक्रेन के शहर स्तानिस्लाव में पैदा हुईं. उनके पिता बेलारूस के थे और मां यूक्रेन की. उन्होंने यूक्रेन, फ्रांस और बेलारूस में काफी वक्त बिताया है. उनकी लेखन शैली की दाद आलोचक भी देते हैं.

अलेक्सिएविच ने एक स्थानीय अखबार के लिए रिपोर्टिंग करने के लिए स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी. इसी दौरान उन्होंने अपनी पहली किताब "वॉर्स अनवुमेनली फेस" लिखी. इस किताब को लिखने के दौरान उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध में भाग लेने वाली सैकड़ों महिलाओं का इंटरव्यू लिया. सोवियत संघ में इस किताब की 20 लाख प्रतियां बिकीं.

उन्होंने चेरनोबिल परमाणु संयंत्र में हुए हादसे पर "वॉयसेस ऑफ चेरनोबिल" किताब लिखी. सोवियत संघ के विघटन के बाद सोवियत कालीन पीढ़ियों ने खुद को नई दुनिया में कैसे ढाला, इस पर भी उन्होंने "सेकेंड हैंड टाइम" नाम की किताब लिखी.

ओएसजे/एमजे (एएफपी, एपी)

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