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दुनिया

भारी विषमता महिला तथा पुरूषों की साक्षरता में

भारत में गांवों तथा शहरों में साक्षरता का अंतर घटकर 15 प्रतिशत रह गया है जबकि महिला तथा पुरूषों के बीच अंतर 16 प्रतिशत है. राष्ट्रीय सैम्पल सर्वे के अनुसार 83 प्रतिशत पुरुष तो केवल 67 प्रतिशत महिलाएं साक्षर हैं.

इसी तरह ग्रामीण इलाकों में 71 प्रतिशत साक्षरता है जबकि शहरी इलाकों में 86 प्रतिशत साक्षरता है. सर्वेक्षण के अनुसार देहाती इलाकों के 4.5 प्रतिशत पुरुषों ने स्नातक स्तर की शिक्षा पाई है जबकि सिर्फ 2.2 प्रतिशत महिलाओं ने स्नातक और उससे ज्यादा की शिक्षा हासिल की है. शहरी इलाकों में 17 प्रतिशत पुरुषों और 13 प्रतिशत महिलाओं ने इस तरह की योग्यता हासिल की है.
ये आंकड़े शिक्षा पर राष्ट्रीय सैम्पल सर्वे के 71वें दौर के नतीजे हैं जो पिछले साल जनवरी से जून 2014 तक कराया गया. इस तरह का सर्वे राष्ट्रीय सैंपल सर्वे कार्यलय ने पिछली बार जुलाई 2007 से जून 2008 के बीच कराया था. यह सर्वेक्षण 4577 गांवों के 36479 परिवारों तथा 3700 शहरी इलाकों में 29447 परिवारों के बीच किया गया.

सरकारी खर्च

ज्यादातर देशों में स्कूल, कॉलेज और अन्य शिक्षा संस्थान बनाने और चलाने का खर्च सरकारें उठाती हैं जबकि इन सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए लोगों को ट्यूशन फीस, परीक्षा फीस और कागज किताब के खर्च के रूप में खुद भागीदारी करनी होती है. भारत में पिछले सालों में व्यापक स्तर पर शिक्षा का निजीकरण हुआ है जिसकी वजह से शिक्षा पर होने वाला खर्च भी तेजी से बढ़ा है. सरकार द्वारा होने वाला खर्च वार्षिक बजटों में शामिल होता है जबकि शिक्षा पर पारिवारिक खर्च का पता इस तरह के सर्वे से चलता है.

एक प्रमुख समस्या स्कूलों के उपलब्ध होने की है. पूरे देश में 99 फीसदी परिवारों के लिए प्राइमरी स्कूल 2 किलोमीटर की दूरी के अंदर मौजूद हैं लेकिन जहां तक सेकंडरी स्कूलों का सवाल है तो देहाती इलाकों में सिर्फ 60 प्रतिशत बच्चों के लिए 2 किलोमीटर के अंदर माध्यमिक स्कूलों की सुविधा है. शहरों में 91 प्रतिशत बच्चों को यह सुविधा है. इसके अलावा शहरों में सार्वजनिक परिवहन या स्कूल बसों की भी सुविधा है.

शिक्षा संस्थानों पर सरकारी निवेश की तस्वीर इन आंकड़ों से भी साफ होती है कि देहाती इलाकों में बहुमत छात्र माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर की शिक्षा सरकारी संस्थानों में पा रहे हैं. प्राइमरी स्तर पर 72 प्रतिशत और माध्यमिक स्तर पर 64 प्रतिशत छात्र सरकारी स्कूलों में जा रहे हैं तो शहरों में प्राइमरी स्तर पर सिर्फ 31 प्रतिशत और माध्यमिक स्तर पर 38 प्रतिशत छात्र सरकारी संस्थानों में दाखिल हैं.

फीस पर असली खर्च

नौकरी के लिए शिक्षा की बढ़ती जरूरत को देखते हुए देश भर में 26 प्रतिशत छात्र प्राइवेट कोचिंग लेते हैं. करीब पांच प्रतिशत छात्र हॉस्टलों में रहकर पढ़ते हैं. शिक्षा पर इस सेशन में छात्रों का औसत खर्च सामान्य शिक्षा के लिए 6788 रुपये, व्यावसायिक कोर्स के लिए 27,676 रुपये और तकनीकी शिक्षा के लिए 62,841 रुपये हैं. प्राइमरी स्तर पर प्रति छात्र देहाती इलाकों में 2811 रुपये और शहरों में 10,083 रुपये का खर्च आता है. तकनीकी शिक्षा के निजी संस्थानों में सरकारी संस्थानों के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा खर्च होता है. सामान्य शिक्षा में खर्च का 46 प्रतिशत और तकनीकी शिक्षा में 73 प्रतिशत कोर्स फीस पर होता है.

देहाती परिवारों में सिर्फ 6 प्रतिशत के पास कंप्यूटर है जबकि शहरों में रहने वाले परिवारों में 29 प्रतिशत के पास कंप्यूटर है. ऐसे परिवारों में जिनमें 14 साल से कम उम्र का कम से कम एक बच्चा है, 2014 में 27 प्रतिशत के पास इंटरनेट की सुविधा थी. देहातों में 16 प्रतिशत और शहरों में 49 प्रतिशत परिवारों को इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध थी. 14 से 29 साल की उम्र में देहाती इलाकों में सिर्फ 18 प्रतिशत लोग कंप्यूटर ऑपरेट करना जानते हैं जबकि शहरों में 49 प्रतिशत कंप्यूटर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

एमजे/एसएफ (वार्ता)

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