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दुनिया

भारी मन से उठे भारी ताबूत

मासूम बच्चों के जनाजे को कांधा देने पाकिस्तान जब उठा, तो हिम्मत जवाब दे गई. कहते हैं ताबूत जितना छोटा होता है, वजन उतना ज्यादा होता है. जिन मां बाप ने बच्चों को तैयार कर स्कूल भेजा, वे उनके बेजान बदन को नहीं संभाल पाए.

अख्तर हुसैन आखिरी बार अपने 14 साल के बेटे फहद को आंख भर देख लेना चाहते हैं लेकिन उनकी आंखों से बहते आंसू उनकी नजर को धुंधला कर दे रहे हैं. सालों तक दुबई में काम करके अपने बच्चे को पढ़ाने वाले हुसैन को कोई संभाल नहीं पा रहा है, "उन्होंने कुछ मिनटों में वह सब तबाह कर दिया, जिसके लिए मैं पूरी जिंदगी जीया - मेरा बेटा."

पेशावर के सैनिक स्कूल में मारे गए 141 लोगों के लिए नमाजे जनाजा पढ़ाने का सिलसिला जो मंगलवार को शुरू हुआ, वह बुधवार को भी जारी रहा. शाहरुख खान नाम का छात्र भी उस वक्त स्कूल में था, जब तालिबान के आतंकवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. वह एक डेस्क के नीचे छिप गया. पर साथियों को दफ्न होते देख शाहरुख खुद पर काबू नहीं रख पाया. अपनी सुबकी और चीख दबाने के लिए उसने स्कूल ड्रेस की टाई अपने मुंह में ठूंस ली, "मैंने काले रंग के बूटों का जोड़ा मेरी तरफ आते देखा. शायद यह शख्स उन बच्चों को ढूंढ रहा था, जो डेस्क के नीचे छिप गए थे. वह चुन चुन कर वहां लेटे बच्चों को गोली मार रहा था."

16 साल के शाहरुख ने क्लासरूम और स्कूल के दुनिया से बाहर का तांडव देख लिया, "मैं भी वहां पड़ा रहा और किसी गोली का इंतजार करने लगा. मैंने आंखें बंद कर लीं. मेरा पूरा शरीर कांप रहा था. मैं काले बूटों के इस जोड़े को जिंदगी भर नहीं भूल पाऊंगा."

Pakistan Taliban-Überfall auf Schule in Peshawar 16.12.2014

कैसे उठे बच्चों का जनाजा

मंगलवार को पेशावर के वरसाक रोड पर आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमला हुआ. यह संस्था पूरे पाकिस्तान में स्कूल चलाती है. यहां 10 से 18 साल के बच्चे पढ़ते हैं. पाकिस्तान में यूं तो आतंकवादी हमले होते रहते हैं लेकिन यह शायद पहला मौका था, जब आतंकवादियों ने बच्चों को निशाना बनाया और इस बड़ी संख्या में लोगों की जान गई.

पाकिस्तान की सरकार ने बच्चों के मारे जाने के बाद तीन दिन के राष्ट्रीय शोक का एलान किया है. प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने आतंकवाद से जुड़े मामलों में मौत की सजा को खत्म करने का फैसला वापस ले लिया है. यानि पाकिस्तान आतंकवादियों को मौत की सजा दे सकता है. इससे पहले भरे मन से शरीफ ने कहा, "यह मेरा जाति नुकसान है. ये मेरे बच्चे थे. ये मेरे वतन का नुकसान है."

पाकिस्तानी तालिबान ने हमले की जिम्मेदारी ली है और कहा है कि तालिबान "साथियों और उनके परिवारों" की हत्या के बदले में उसने यह कार्रवाई की है. इसके प्रवक्ता मुहम्मद खोरसानी का कहना है, "हम ऐसा कर रहे हैं ताकि हम उन्हें अहसास करा सकें कि जब आपके अपने मरते हैं, तो आपको कैसा दर्द होता है. हम ऐसा कर रहे हैं ताकि उनके परिवार भी शोक मना सकें, जैसा कि हमारे परिवार मना रहे हैं."

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