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दुनिया

भारत हमेशा खास साझीदार रहेगाः रूस

रूस ने कहा है कि भारत उसका विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझीदार बना रहेगा और उसे संवेदनशील तकनीकें भी रूस से मिलती रहेंगी. रूस के उप प्रधानमंत्री सर्गेई इवानोव ने यह बात कही है.

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2008 में आए थे राष्ट्रपति मेद्वेदेव

मॉस्को में भारत रूस व्यापारिक बैठक को संबोधित करते हुए इवानोव ने कहा कि भारत के साथ साझेदारी भरोसे पर आधारित है और रूस भारत को हर तरह की संवेदनशील जानकारी देने को तैयार रहा है. व्यापार और आर्थिक सहयोग पर दोनों देशों की सरकारों के साझा आयोग के सहअध्यक्ष इवानोव ने कहा कि भारत ही इकलौता ऐसा देश है जिसे रूस रक्षा और सुरक्षा जरूरतों के लिए अत्याधुनिक ग्लोनास सिग्नल तकनीक देने पर सहमत है. उन्होंने कहा, "भारत दुनिया में अब तक इकलौता देश है और बहुत संभव है कि आगे भी इकलौता ही रहे जिसके साथ

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रूस ग्लोनास सिग्नल तकनीक साझा करने को तैयार हैं."

ग्लोनास अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की तरफ से तैयार की गई ग्लोबल पॉजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) के जवाब में तैयार की गई रूसी तकनीक है. नई दिल्ली और मॉस्को के बीच हुई संधि के मुताबिक भारत इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकता है जिसके जरिए निर्देशित मिसाइलें निशाने को सटीक तरह भेद सकती हैं.

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मुख्य सचिव टीकेए नायर से मुलाकात के बाद इवानोव ने कहा, "ग्लोनास नेविगेशन के मामले में हमारा सहयोग अपनी एक मिसाल है." इवानोव ने भारतीय उद्योगपतियों से अपील की कि वे रूस के फार्मा उद्योग और आईटी सेक्टर में निवेश करें. नायर तीन के रूस दौरे पर गए हैं और उनके साथ भारतीय आईटी और फार्मा कंपनियों के प्रतिनिधियों का दल भी गया है. नायर ने कहा कि भारत और रूस के बीच उच्च तकनीक और परमाणु ऊर्जा सहित आविष्कार के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने की जरूरत है. .

एक बड़े अधिकारी ने बताया कि रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेद्वेदेव के हालिया भारत दौरे में दोनों देशों के नेताओं ने आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, परमाणु ऊर्जा और जैव तकनीक सहित उच्च तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने पर सहमति जताई.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एमजी

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