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दुनिया

भारत से मुक्त व्यापार समझौता चाहता है जर्मनी

भारत के साथ कारोबारी रिश्तों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए जर्मनी मुक्त व्यापार समझौता करने का ख्वाहिशमंद है. यूरोपीय संघ से मंजूरी मिलने के बाद जर्मनी भारत से इस बारे में जल्दी ही बातचीत शुरू करेगा.

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अक्तूबर में मिले दोनों विदेश मंत्री

भारत में जर्मनी के एक वरिष्ठ दूत ने कहा कि यूरोपीय संघ की हरी झंडी मिलते ही बातचीत शुरू कर दी जाएगी. जर्मन कारोबार और निवेश के प्रमुख अधिकारी मिषाएल फीफर ने कहा, "हम बातचीत करना चाहते हैं. लेकिन यूरोपीय संघ का सदस्य होने के नाते उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही बातचीत शुरू की जा सकती है."

यूरोपीय संघ के देशों में सबसे ज्यादा निर्यात करने वाला देश जर्मनी ही है. जर्मनी के भारत के साथ बेहतर दोतरफा रिश्ते भी हैं. अगर कारोबार के लिहाज से देखें तो भारत की करीब 250 कंपनियां जर्मनी में कारोबार कर रही हैं. इसी तरह जर्मनी की भी 600 कंपनियों का काम भारत में चल रहा है. भारत ने जर्मनी में केवल सूचना और संचार की तकनीक के लिए करीब 5.1 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है.

2009 में जर्मनी ने भारत को 808 अरब यूरो कीमत की वस्तुएं और सेवाएं निर्यात कीं जबकि आयात के लिए यह रकम करीब 674 अरब यूरो रही. मिषाएल के नेतृत्व में जर्मन कारोबारियों का एक बड़ा दल जल्दी ही भारत के दक्षिणी राज्यों का दौरा कर कारोबारी समझौते करने की तैयारी में है. भारत का बड़ा बाजार दुनिया भर के देशों को अपनी ओर खींच रहा है और ऐसे में जर्मनी भी पीछे नहीं रहना चाहता.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः वी कुमार

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