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दुनिया

भारत से फलता फूलता छिपकली के लिंग का बाजार

अच्छी किस्मत पाने के लिए ऑनलाइन बिक रही दुर्लभ भारतीय जड़ी बूटी "हथजोड़ी" के नाम पर धोखे से बेचे जा रहे हैं खतरे में पड़े छिपकलियों के लिंग. देखिए कैसे भारत से फल फूल रहा है इसका अवैध बाजार.

भारत और ब्रिटेन के वन्यजीव जांचकर्ताओं का कहना है कि उन्हें धोखाधड़ी के एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय कारोबार का पता चला है जो खतरे में पड़ चुकी छिपकली की एक प्रजाति मॉनिटर लिजर्ड के लिंग को सुखा कर बेचते हैं. इसमें धोखा यह दिया जा रहा है कि इस सूखे हुए लिंग को एक पौधे की जड़ बताया जाता है, जिसका कई देशों में कुछ धार्मिक रस्मों में इस्तेमाल होता है.

लंदन स्थित समूह वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन ने कहा कि सुखाये गये लिंग बंगाल मॉनिटर लिजर्ड और येलो मॉनिटर लिजर्ड प्रजाति की छिपकलियों के हैं. सूखने के बाद यह लिंग दिखने में एक दुर्लभ पौधे की जड़ों जैसे लगते हैं. यही कारण है कि अच्छी किस्मत के लिए उस जड़ को अपने पास रखने वाले अंधविश्वासी लोग इसे खरीदना चाहते हैं और इसका बड़ा बाजार मौजूद है.

वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन के नील डिक्रूज ने बताया कि वन्यजीव अधिकारियों ने भारत के पांच राज्यों में पिछले महीने छापे मार कर इसे बरामद किया. छापे मारने का सिलसिला अभी भी जारी है. नई दिल्ली स्थित वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अनुसार, ये पौधा भारत से गायब हो चुका है लेकिन तस्कर छिपकली के अंगों को खरीद रहे हैं और इन्हें दुर्लभ पौधा बता कर ऑनलाइन बेच रहे हैं.

वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अपराध नियंत्रण विभाग के जोस लुइज बताते हैं कि बंगाल मॉनिटर लिजर्ड और येलो मॉनिटर लिजर्ड प्रजातियां भारत में भी लुप्तप्राय जीवों की सूची में रखी गयी हैं. उन्होंने जानकारी दी कि ओडीशा में छापों में ऐसे दर्जनों हेमीपेनिस यानि नर छिपकली के प्रजनन अंग बरामद हुए. लुइज ने कहा, "छिपकली का हेमीपेनिस सूखने के बाद ऐसा दिखता है जैसे दो हाथ प्रार्थना के लिए जुड़े हों. यह "हथजोड़ी" जड़ जैसा लगता है जिसके बारे में मान्यता है कि उससे बुराई दूर रहती है." इसके अलावा इस जड़ के बारे में कई लोगों का विश्वास है कि "इससे आप कोर्ट केस से बच जाते हैं."

इंग्लैंड की मैनचेस्टर मेट्रोपोलिस यूनिवर्सिटी ने कई नमूनों की जांच के बाद पुष्टि की है कि वे छिपकली के लिंग ही हैं. वन्यजीव संरक्षक बताते हैं कि ऑनलाइन बिक रहे इन अंगों की मात्रा बहुत ज्यादा है. भारत के केंद्रीय और पूर्वी राज्यों में आदिवासी लोग इन बड़े आकार की छिपकलियों का शिकार कर उन्हें खाते हैं. उन्हें अब तक जानकारी नहीं है कि इन्हें मारना या पकड़ कर रखना एक ऐसा अपराध है, जिसके लिए उन्हें सात साल तक की कैद हो सकती है. इसके अलावा अंधविश्वास इन बचे खुचे जीवों पर और भी ज्यादा भारी पड़ रहा है.

आरपी/एमजे (एपी)

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