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दुनिया

भारत से गायों की तस्करी

भारत बांग्लादेश की सीमा पर हिंसा को रोकने के लिए गायों के निर्यात को वैध बनाने की सलाह दी गई है. भारत के अधिकांश हिस्से में गौहत्या पर रोक है. गायों को गौमाता कहा जाता है और धर्म में उन्हें काफी माना जाता है.

भारत से बड़ी तादाद में गायों की तस्करी होती है. खासकर बांग्लादेश में. भारतीय सीमा सुरक्षा बल बीएसएफ बड़ी संख्या में दर्जनों लोगों को मारते हैं जिनमें से अधिकतर तस्कर होते हैं. भारतीय अधिकारियों के अनुसार पिछले सालों में बीएसएफ ने 261 बांग्लादेशियों को मार गिराया. भारत की अंतरराष्ट्रीय फोरमों में इसके लिए काफी आलोचना की जाती है.

पिछले ही सप्ताह बीएसएफ प्रमुख के पद से रिटायर होने वाले उत्थान कुमार बंसल ने भारत की वर्तमान नीति पर सवाल उठाया है. भारत में गाय पवित्र जानवर है. "बीएसएफ की नीतियां बनाने से कुछ नहीं होगा. हमें इस मुद्दे को हल करने के लिए अलग रास्ता खोजना होगा. यह अफरातफरी तभी खत्म होगी जब सीमा पार व्यापार को कानूनी बना दिया जाएगा."

बढ़ता अवैध व्यापार

बांग्लादेश की एक करोड़ साठ लाख आबादी के 90 फीसदी से ज्यादा लोग मांस खाते हैं और कोलकाता के स्वतंत्र शोधकर्ता बिमल प्रामाणिक का कहना है कि हर साल जिन गायों को मारा जाता है कि उनमें से अधिकतर भारत से आती हैं. भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाले इस अवैध व्यापार का आंकड़ा पांच करोड़ रुपये के करीब है.

भारत के राजस्थान, हरियाणा और पंजाब से गाएं पश्चिम बंगाल के पशु बाजारों में लाई जाती हैं, ये सारे बाजार बांग्लादेशी सीमा पर हैं. संगठित गैंग इन गायों को बाजारों से खरीदते हैं और 2,400 किलोमीटर की सीमा पर अलग अलग जगहों से उनकी तस्करी करते हैं.

सरकार को कहा जा रहा है कि वह व्यापार पर प्रतिबंध के बारे में फिर से सोचे. बताया जाता है कि गायों की तस्करी करने वाले लोग भारतीय पुलिस, बीएसएफ और कस्टम अधिकारियों को अपने काम के लिए रिश्वत देते हैं. एक तस्कर कालू के मुताबिक, "कभी कभी बीएसएफ के जवानों के साथ टक्कर होती है, खासकर रिश्वत के मामले में. अगर गायों को ले जाने वाला कीमत चुकाने से मना कर देता है तो फिर वह परेशानी उठाता है. इसमें उसकी पिटाई या फिर कुछ मामलों में जान से मार देने की स्थिति भी आ जाती है. आरोप है कि इस तस्करी के लिए भारत की पुलिस, बीएसएफ और कुछ नेताओं को भी उनका हिस्सा मिलता है."

ढाका की कोशिश

हालांकि बंसल की सलाह से दिल्ली में कोई हलचल नहीं हुई है लेकिन ढाका ने इस विचार का स्वागत किया है. बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्री गुलाम मोहम्मद कादर ने कहा कि लंबे समय से बांग्लादेश भारत से मांग कर रहा है कि वह प्रतिबंधित चीजों में पशुओं के निर्यात पर रोक हटा दे. "गायों की अवैध तस्करी में कई लोगों की जान गई है. अगर भारत बांग्लादेश को गाय निर्यात करना शुरू कर देता है तो इस तरह की घटनाएं रुक जाएंगी और सीमा पर शांति हो जाएगी. हम भारत से गाएं निर्यात करना चाहते हैं और चाहते हैं कि इससे जुड़ी अवैध कार्रवाई खत्म हो जाए."

ढाका के थिंक टैंक सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग के कार्यकारी निदेशक मानते हैं कि इस निर्यात को वैध बनाने से सीमा पर मौतें कम होंगी. "पशुओं के निर्यात को वैध बनाने से सीमा पर बड़ी संख्या में होने वाली मौतें कम हो जाएंगी. इससे दोनों देशों के बीच आपसी संबंध भी सामान्य हो सकेंगे. हमने ऐसी बैठकें बहुत कम देखी हैं जिसमें ढाका ने बांग्लादेशी नागरिकों की सीमा पर मार पीट और मौत का मुद्दा न उठाया हो.

हालांकि भारत के हिंदुवादी गुटों का मानना है कि इस व्यापार से रोक नहीं हटनी चाहिए. विश्व हिंदू संगठन के नेता अजय नंदी कहते हैं, "गाय हमारी माता है. हम कभी भारत सरकार को गाएं किसी मुस्लिम देश को निर्यात नहीं करने देंगे, जहां उन्हें मार दिया जाए. उनकी चेतावनी है कि अगर इस व्यापार को वैध बनाया गया तो देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा. उनके शब्दों में, "हम ऐसे हिंदू विरोधी कदम के खिलाफ किसी भी हद तक जा सकते हैं."

रिपोर्टः शेख अजीजुर्रहमान/आभा मोंढे

संपादनः महेश झा

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