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दुनिया

भारत लंका में मछुआरों का मुद्दा

श्रीलंका में आए दिन भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी द्विपक्षीय संबंधों के लिए गंभीर चुनौती बन गया है लेकिन इस बहाने जो राजनीति हो रही है, उसमें गरीब मछुआरे पिस रहे हैं और उनके समक्ष रोजी रोटी का संकट बढ़ रहा है.

श्रीलंका के मत्स्य पालन विभाग का कहना है कि भारतीय मछुआरे गहरे समुद्र में संगठनात्मक रूप से मछली पकड़ रहे हैं और एक रणनीति के तहत समुद्री सीमा का उल्लंघन कर रहे है. श्रीलंका के मुताबिक वे हर साल उसकी समुद्री सीमा में घुस कर करीब साढ़े छह करोड़ किलो मछली पकड़ रहे हैं जिससे उसे भारी नुकसान हो रहा है. इस समस्या के हल के लिए उसने यूरोपीय संघ पर भी टकटकी लगाई लेकिन वहां से उसे कोई जवाब नहीं मिला.

भारतीय और श्रीलंका की मछलियों का सबसे बड़ा बाजार यूरोपीय संघ है. श्रीलंका ने यूरोपीय संघ में अनौपचारिक शिकायत की थी कि वह भारत पर अवैध मछली पकड़ने पर रोक लगाने के लिए दबाव बनाए लेकिन संघ का कहना है कि इस तरह के द्विपक्षीय मामलों में हस्तक्षेप का उसे अधिकार नहीं है. श्रीलंका का आरोप है कि उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों के अनुसार भारतीय मछुआरे संगठित रूप से यह काम कर रहे हैं और यह रुकना चाहिए.

शपथ ग्रहण में आए राजपक्षे

भारत में आम चुनाव के बाद पड़ोसी देशों के साथ संबंध बेहतर बनाने के लिए अपने शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (दक्षेस) के सभी शासनाध्यक्षों को बुलाया और सभी ने इस समारोह में शिरकत की. इस दौरान श्रीलंका के साथ ही पाकिस्तान ने "परस्पर संबंधों को बेहतर बनाने के लिए" भारतीय मछुआरों को रिहा किया. भारत की नई सरकार ने साथ दोनों पड़ोसी मुल्कों के संबंध मधुर बनाने की यह बेहतर पेशकश थी और भारत ने इसका स्वागत किया.

Fischer in Indien

भारतीय मछुआरों की दिक्कतें

श्रीलंका का कोई राष्ट्रपति पहली बार भारतीय प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुआ. राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे जब शपथ ग्रहण समारोह के अतिथि थे, तमिलनाडु के एमडीएमके नेता वाइको दिल्ली के जंतर मंतर पर उनकी भारत यात्रा के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता विरोध स्वरूप शपथ समारोह में शामिल नहीं हुईं. डीएमके नेता एम करुणानिधि को भी मछुआरों के नाम पर अपनी राजनीति करनी थी इसलिए वह भी समारोह में नहीं आए. तमिल संगठन तो इस पर लगातार विरोध कर रहे थे.

भारतीय मछुआरों का आरोप

तमिल मछुआरा संगठनों का आरोप है कि उन्हें मादक पदार्थ अधिनियम के तहत श्रीलंका की जेलों में ठूंसा जाता है. तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता तो आए दिन इस मामले में प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर अपने राज्य में सुर्खियां बटोरती हैं. इस बहाने वह मछुआरों को भरोसा दिलाती हैं कि वह उनकी हितैषी हैं लेकिन यदि वह सचमुच हितैषी होतीं तो दिल्ली आकर राजपक्षे से बात करतीं और समस्या का समाधान निकालने की पेशकश करतीं. ऐसा लगता है कि सभी राजनीतिक फायदा उठाने की कवायद कर रहे हैं.

भारतीय मछुआरों के लिए गहरे समुद्र का कच्चाथीवी द्वीप सबसे ज्यादा संकट वाला इलाका बना हुआ है. भारतीय मछुआरे उसे अपनी सीमा समझते हैं लेकिन श्रीलंका की नौसेना उसे अपना हिस्सा बताती है और उस द्वीप पर मछली पकड़ रहे मछुआरों को पकड़ कर श्रीलंका ले जाती है. एक सूचना के अनुसार इस द्वीप को भारत का हिस्सा समझते हुए भारतीय मछुआरे कई बार नौसैनिकों से भिड़ जाते हैं. इस संघर्ष में अब तक करीब 350 भारतीय मछुआरे मारे जा चुके हैं.

कहां है विवादित द्वीप

कच्चाथीवी द्वीप निर्जन है. वहां कोई बस्ती नहीं. इस द्वीप को भारत ने एक समझौते के तहत 1974 में श्रीलंका को सौंप दिया था. बार बार विवाद का कारण बन रहे इस द्वीप को श्रीलंका सरकार ने 2009 में यह कहते हुए पवित्र भूमि घोषित किया कि यह जमीन धार्मिक भाव से दी गई है. श्रीलंका ने कहा कि उस समय जयललिता मुख्यमंत्री नहीं थीं और उन्होंने श्रीलंका के तमिलों की सहानुभूति अर्जित करने के लिए कच्चाथीवी द्वीप श्रीलंका को सौंपने का समर्थन किया था.

फिलहाल जरूरत मछुआरों की समस्या के समाधान की है और दोनों देशों को मछुआरों के हितों के लिए समुद्री सीमा के विवाद को सुलझाने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे ताकि मछुआरों की आजीविका पर असर न पड़े.

एजेए/एमजे (वार्ता)

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