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दुनिया

भारत रत्न के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और स्वर्गीय पंडित मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा एक ओर समर्थकों के हर्ष का कारण बनी तो दूसरी ओर कई सवालों का पिटारा खोलती दिखी.

भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मान के लिए वाजपेयी और महामना के नामों के एलान के साथ ही चर्चाओं का बाजार गर्म होना स्वाभाविक है. अब तक 43 गणमान्य व्यक्तियों को देश का यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है. वाजपेयी को भारत रत्न देने का कई बड़ी हस्तियों ने दिल खोलकर स्वागत किया. यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी वाजपेयी को भारत रत्न देने का समर्थन किया.

नोबेल पुरस्कार विजेता प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने भी वाजपेयी को भारत रत्न से सम्मानित करने के फैसले का समर्थन किया है. सेन मोदी की नीतियों के विरोधी माने जाते हैं. जब बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया था तब सेन ने इस पर खुलकर विरोध दर्ज कराया था.

बिहार विधान परिषद ने वाजपेयी और मालवीय को भारत रत्न देने पर बधाई देने के साथ ही समाजवादी नेता स्वर्गीय राम मनोहर लोहिया, पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर और डा. श्रीकृष्ण सिंह को भी भारत रत्न देने की मांग के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया.

दूसरी ओर, जाने माने इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने मालवीय को भारत रत्न दिए जाने को गलत करार बताया और कहा कि किसी मृत या बहुत पहले दुनिया छोड़ चुके व्यक्ति को भारत रत्न नहीं दिया जाना चाहिए.

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया था कि मालवीय को उनकी विद्वता और देशभक्ति के लिए सर्वोच्च सम्मान मिला है.

गुहा ने यह भी कहा है कि देश ने मालवीय से भी महान विद्वान और देशभक्त दिए हैं फिर रवींद्र नाथ टैगोर, ज्योतिबा फुले, बाल गंगाधर तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले, विवेकानंद, अकबर, शिवाजी, गुरुनानक, कबीर, अशोक को भारत रत्न क्यों नहीं दिया जाता. बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के करीबी रहे सुधीन्द्र कुलकर्णी ने भी मृत्यु के बाद भारत रत्न देने की परंपरा को गलत बताया है.

कई लोगों का तर्क है कि वाजपेयी और महामना दोनों से महान ऐसे कई भारतीय हुए हैं जो इस सर्वोच्च पुरस्कार के हकदार हैं. विद्वता में रवीन्द्रनाथ टैगोर तो देशभक्ति में बाल गंगाधर तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले, भगत सिंह जैसे कई आजादी के परवानों का नाम आता है. मालवीय को चुन कर मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी की जनता से किए वादे को पूरा किया है. जिस पर मोदी विरोधियों का यही कहना है कि दूसरे लोगों के ना चुने जाने का कारण शायद यही है कि उन्होंने मोदी के निर्वाचन क्षेत्र में काम नहीं किया था.

अब तक सम्मानित किए गए लोगों में राजनेताओं और प्रधानमंत्रियों की इतनी अधिक संख्या पर भी चर्चाएं चलीं. कांग्रेस के शासनकाल में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु और इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए खुद भारत रत्न पुरस्कार ग्रहण किए थे.

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