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विज्ञान

भारत में 15 करोड़ इंटरनेट यूजर

भारत में इस साल इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या 15 करोड़ पहुंच जाएगी. इसमें ग्रामीण भारत की बहुत बड़ी भूमिका है, जहां इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.

संपूर्ण भारत में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) तथा आईएमआरबी की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या दिसंबर 2012 तक बढ़कर 15 करोड़ होने का अनुमान है. रिपोर्ट के अनुसार शहरी भारत में 10.5 करोड़ तथा ग्रामीण भारत में 4.5 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता होंगे.

सक्रिय उपभोक्ता भी बढ़े: वर्तमान इंटरनेट उपभोक्ताओं में से 9.7 करोड़ सक्रिय उपभोक्ता (एक्टिव यूजर्स) हैं जो महीने में कम से कम एक बार इंटरनेट का इस्तेमाल जरूर करते हैं. घरों से इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और तकरीबन 37 फीसदी एक्सेस इस श्रेणी में दर्ज किया गया है. इस रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि भारतीय इंटरनेट यूजर्स में से 48 फीसदी हर हफ्ते कम से कम 5 से 6 बार इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 28 फीसदी हर रोज इंटरनेट का प्रयोग करते हैं.

स्मार्ट इंडिया: भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों को स्मार्ट माना जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले दो साल में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 7.2 गुना बढ़ी है. ग्रामीण क्षेत्रों में 2010 में जहां 50 लाख इंटरनेट उपभोक्ता थे वहीं जून 2012 तक ग्रामीण भारत में 3.8 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता हैं. इस मायने में ग्रामीण क्षेत्र भी अब स्मार्ट होते जा रहे हैं. आई क्यूब रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण भारत में बसने वाले 83.3 करोड़ लोगों में से 7 करोड़ लोग कम्प्यूटर साक्षर हैं. इसमें से 3.8 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता और 3.1 करोड़ सक्रिय उपभोक्ता हैं.

मोबाइल इंटरनेट इस्तेमाल बढ़ा: नए स्मार्ट फोन की उपलब्धता और बेहतर कनेक्टेविटी से मोबाइल इंटरनेट एक्सेस करने के प्रमुख स्रोत के रूप में अपनी जगह बना रहा है. यहीं नहीं ग्रामीण भारत में 32.3 करोड़ मोबाइल धारकों में से 36 लाख ग्रामीण इंटरनेट उपभोक्ताओं मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं.

स्थानीय भाषाओं का बढ़ता वर्चस्व: यही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं की उपलब्धता और इस्तेमाल भी बढ़ रहा है. हालांकि अभी भी 79 फीसदी लोग अंग्रेजी में इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं लेकिन हिन्दी इस्तेमाल करने वालों की तादाद भी अब 32 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

उल्लेखनीय है कि पहले की तरह अभी भी साइबर कैफे आम आदमी को इंटरनेट से जोड़ने का प्रमुख जरिया बना हुआ है. गांवों में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार तथा निजी संस्थानों द्वारा कम्युनिटी सर्विस सेंटर (सामुदायिक सेवा केंद्र) या साइबर कैफे खोले गए हैं.

इंटरनेट कनेक्शन और उपभोक्ता संख्या के अनुपात के अनुसार कम्युनिटी सर्विस सेंटर (सीएससी) और साइबर कैफे हर महीने 148 और 190 यूजर्स प्रति कनेक्शन के साथ संचार क्रांति को गांव गांव तक पहुंचा रहे हैं.

लेकिन असली संचार क्रांति को समूचे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचने में अभी भी थोड़ा समय लगेगा. विडंबना ही है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में 29 प्रतिशत लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए अपने घर से 10 किलोमीटर से भी अधिक का सफर तय करते हैं.
क्या है इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया: आईएएमएआई ऑनलाइन पब्लिशर्स का एक संगठन है, जो मोबाइल कंटेंट तथा सेवाओं, ऑनलाइन पब्लिशिंग, मोबाइल विज्ञापन, ऑनलाइन विज्ञापन, ई-कॉमर्स और मोबाइल व डिजिटल भुगतान समेत डिजिटल और ऑनलाइन उद्योग के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित हुआ है. इसके कार्यालय दिल्ली और मुंबई में हैं तथा वर्तमान में 110 भारतीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियां इसकी सदस्य हैं.

रिपोर्टः संदीपसिंह सिसोदिया, वेबदुनिया

संपादनः ए जमाल

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