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दुनिया

भारत में हर मिनट एक सड़क दुर्घटना

दुर्घटनाओं पर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़े दिल दहलाने वाले हैं. पिछले साल सड़क हादसों में हर घंटे 16 लोग मारे गए. दिल्ली रोड पर होने वाली मौतों के मामले में सबसे आगे रही जबकि उत्तर प्रदेश सबसे घातक प्रांत रहा.

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो ने दुर्घटनाओं और आत्महत्याओं पर अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि भारत में 2014 में साढ़े चार लाख से ज्यादा दुर्घटनाएं हुईं जिनमें 1 लाख 41 हजार से ज्यादा लोग मारे गए. वहीं सवा लाख से अधिक लोगों ने जीने में कोई लाभ नहीं देखा और परेशानी में अपनी जान खुद ले ली, जिनमें किसान और महिलाएं सबसे ऊपर रहे. रिपोर्ट के अनुसार, हादसों में होने वाली मौत के मामले में दिल्ली शहर चोटी पर रही जहां पिछले साल 7,191 दुर्घटनाएं दर्ज हुईं. इनमें कुल 1,332 लोगों की जान चली गई और 6,826 लोग घायल हुए.

पिछले दस साल की अवधि में सड़क हादसों में होने वाली मौतों में साढ़े 42 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में आबादी में सिर्फ साढ़े 14 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. ज्यादातर मौतें टू-व्हीलर की दुर्घटना में हुई हैं और तेज और लापरवाह ड्राइविंग उनका कारण रही है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के अनुसार साढ़े चार लाख सड़क दुर्घटनाओं में 1 लाख 41 हजार से ज्यादा लोग मारे गए. इनमें से एक तिहाई की मौत उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में हुई.

तमिलनाडु में सड़क दुर्घटना के सबसे अधिक मामले हुए और सबसे अधिक लोग घायल भी हुए. सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश का रहा. जबकि शहरों के मामले में 2,199 मौतों के साथ सबसे ज्यादा मौतें राजधानी दिल्ली में दर्ज हुई. चेन्नई 1,046 मौतों के साथ दूसरे नंबर पर रहा और 844 मौतों के साथ जयपुर तीसरे नंबर पर रहा.

सड़क दुर्घटनाओं की संख्या और उनमें मरने वालों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो संदेश 'मन की बात' में भी उसका जिक्र किया. उन्होंने दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई और लोगों की जान बचाने के लिए कदम उठाने की घोषणा की. प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार सड़क परिवहन और सुरक्षा कानून बनाएगी तथा दुर्घटना के शिकारों को बिना पैसा चुकाए तुरंत चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध कराएगी. दुर्घटना के बाद, शुरुआती 50 घंटे घायल की जान बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं.

इसी जुलाई में दिल्ली में एक मैनेजमेंट छात्र की दुर्घटना में अत्यधिक खून बहने से मौत हो गई. वह दस मिनट तक सड़क पर रहा और कोई उसकी मदद के लिए नहीं आया. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस घटना की तस्वीरों ने उन्हें परेशान किया. उन्होंने माता-पिता से सड़क सुरक्षा के बारे में अपने बच्चों से बात करने की अपील की और उन्हें गाड़ी चलाते समय सही बर्ताव करने के लिए संवेदनशील बनाने की अपील की.

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