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दुनिया

भारत में सख्त होंगे ट्रैफिक के नियम

इस साल बैंक में काम करने वाले राकेश पिल्लै सालों की मेहनत के बाद साइकिल छोड़ कार में सवार हुए हैं. जीवन भर साइकिल और स्कूटर पर चलने वाले इस परिवार के पास चमचमाती कार तो आई लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस किसी के पास नहीं.

इस बात से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था कि परिवार का कोई भी व्यक्ति कार चलाना नहीं जानता. कार खरीदते ही पिल्लै ने नई दिल्ली में अपने अड़ोस पड़ोस की गलियों में कार घुमाई और एक दो लोगों से टकराने से बचे, मुड़ते समय कार को दरवाजे से टकरा दिया और रिवर्स करते समय कार दीवार से भिड़ा दी. 31 साल के पिल्लै कहते हैं, "भारत में अधिकतर ड्राइवरों का नियम है कि किसी के लिए मत रुको. न तो कार वाले पैदल लोगों के लिए रुकते हैं और न ही पैदल कार वालों के लिए."

भारत के रास्तों को दुनिया के सबसे खतरनाक रास्तों में गिना जाता है. इसका एक मुख्य कारण नौसिखिए चालकों का होना है. दूसरी वजहों में कानून पर अमल न होने के अलावा अव्यवस्थित और खराब हाइवे शामिल हैं. और सड़कों पर चलने वाली वो कारें भी जो आधुनिक क्रैश टेस्ट नहीं पास कर पातीं. बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं की संख्या देख कर जागी नई सरकार ने तय किया है कि वह अगले पांच साल में सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा हर साल 20 फीसदी कम करेगी. यह 1947 से अब तक किया गया सबसे महत्वाकांक्षी फैसला है.

लाखों की मौत

भारत में पिछले दस साल में कार दुर्घटनाओं में करीब 12 लाख लोग मारे गए यानि हर मिनट में करीब चार मौतें और 55 लाख गंभीर रूप से घायल हुए. जहां दूसरी उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने वालों की संख्या गाड़ियों की बिक्री बढ़ने के बावजूद कम हुई है वहीं भारत में यह पिछले दशक में आधा फीसदी बढ़ गई.

भविष्य में भारत में गलत और खतरनाक ड्राइविंग के लिए भारी जुर्माना और जेल की सजा दी जाएगी. सरकार एक ऐसा विभाग बनाना चाहती है जो सिर्फ सड़क सुरक्षा पर ध्यान देगा और कार निर्माताओं पर कड़े कानून लागू करेगा. साथ ही भ्रष्टाचार कम करने के लिए ऑटोमैटेड ड्राइविंग टेस्ट शुरू करेगा.

तेज गाड़ी चलाने वाले वालों या नशे में गाड़ी चलाने वालों को आठ सौ डॉलर का जुर्माना भरना पड़ेगा जो औसत मासिक आय से 10 गुना ज्यादा है और जेल जाने की आशंका भी रहेगी. फिलहाल भारत में गति सीमा से तेज चलाने पर साढ़े नौ सौ रूपये और शराब पी कर गाड़ी चलाने की स्थिति में 3,000 रुपये का दंड दिया जाता है.

सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए कोशिश करने वाले फांउडेशन सेव लाइफ के संस्थापक पीयूष तिवारी कहते हैं, "इससे आदतें रातों रात नहीं बदलेगी. और सरकार कितनी कड़ाई से कानून लागू करती है उस पर इसकी सफलता निर्भर करेगी." पीयूष तिवारी ने अपने भांजे को सड़क दुर्घटना में खोने के बाद ये पहल शुरू की थी.

जून में केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता गोपीनाथ मुंडे की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद नए कानून की पहल हुई. 2000 के बाद से सड़क दुर्घटना का शिकार होने वाले वह तीसरे वरिष्ठ नेता थे.

एक बार में दस

दिल्ली में पिल्लै एक ऐसे सेंटर पर गए जहां दलाल लाइन में खड़े लोगों को लालच दे रहे थे कि करीब 18,000 रूपये देकर बिना टेस्ट और लाइन के वह लाइसेंस ले सकते हैं. एक घंटे बाद पिल्लै ने व्यस्त सड़क पर टेस्ट दी. उन्हें सीधे गाड़ी चलाने, दाहिने लेन में जाने, यू टर्न लेकर शुरुआत की जगह पर जाने को गया. भरी गर्मी में छतरी ले कर खड़ा परीक्षक कार में नहीं गया. वह एक साथ 10 गाड़ियों पर नजर रखे था और साथ में मोटरसाइकल चलाने वालों का भी टेस्ट ले रहा था. भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला कार बजार है. जहां हर साल करीब 20 लाख कारें बिकती हैं.

तेज हाईवे पर कोई टर्न छूट जाए तो ड्राइवर अगले टर्न पर पहुंचने की बजाए गाड़ी पलटाता है और पूरी शान से रॉन्ग साइड जाता है और सामने से सही आने वाली गाड़ी उसे नहीं देख पाए तो नाराज भी होता है. इसके अलावा बैलगाड़ियां और साइकिलें भी हाइवे पर आराम से चलती हैं. सुरक्षा के लिए अभियान अराइव सेफ चलाने वाले हरमन सिंह कहते हैं, "दुख है कि हम आने वाले दिनों में भी मौत का यह कुचक्र देखते रहेंगे. कानून बदलना आसान है सोच और आदत बदलना नहीं."

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