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मनोरंजन

भारत में वाइन की बढ़ती लोकप्रियता

पिछले सालों में शराब और बीयर की बिक्री बहुत बढ़ गई है और अब शहरों में बढ़ रही है मांग वाइन की. भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग वाइन की खपत और उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है.

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भारत में शराब के सेवन को अच्छा नहीं माना जाता और इसकी जड़ें धर्म और राजनीति से जुडी हुई हैं. महात्मा गांधी के सिद्धांतों के अनुसार भारत के संविधान में भी शराब का सेवन वर्जित है. लेकिन तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और समाज में आए नए परिवर्तनों से शराब के सेवन से जुड़े पूर्वाग्रह अब बदल रहे हैं. समय बदल रहा है और साथ साथ बदल रहा है शराब पीने का अंदाज़.

BdT Die 57. Deutsche Weinkönigin in Dresden

बीयर या शराब नहीं, बल्कि वाइन को लोग अब ज्यादा पसंद करते हैं. वाइन को अब एक स्टेट्स ड्रिंक माना जाता है. दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे शहरों में अब ख़ास वाइन क्लब खुल गए हैं. दिल्ली के उद्योगपति विशाल रस्तोगी का कहना है कि वाइन खासकर नौजवानों और महिलाओं में बहुत लोकप्रिय है. वह कहते हैं कि उनके जैसे कई लोग जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं, और वे वाइन पीना पसंद करते हैं.

दस साल पहले भारत में वाइन इतनी लोकप्रिय नहीं थी लेकिन अब इसकी मांग सालाना 25 प्रतिशत बढ़ गयी है. अपेक्षा की जा रही है कि आने वाले पांच सालों में इसकी मांग बढ़ती जाएगी. पिछले सालों में 50 से भी ज्यादा वाइन के बगीचे तैयार किए गए हैं, जो ज्यादातर महाराष्ट्र के नासिक जिले में हैं. कुछ बगीचे बेंगलुरु और हिमाचल प्रदेश में भी हैं. छोटे स्तर पर वाइन का उद्योग देखकर भारत सरकार ने आर्थिक सहयोग और सुविधाएं देने का निर्णय लिया है. महाराष्ट्र सरकार ने वाइन के व्यापारियों पर से आबकारी शुल्क हटाने का और अंगूर की खेती करने वाले किसानों को अनुदान देने का फैसला किया है.

लेकिन वाइन के व्यापारियों की यह शिकायत है कि राज्य सरकार उन पर भारी आबकारी शुल्क लगाती है और वाइन के लिए लाइसेंस भी आसानी से नहीं मिलता. उद्योग जगत के जानकार आलोक चन्द्र बतातें हैं कि हमें नई नीति की जरूरत है, जो प्रतिद्वंद्विता को बढ़ाए और वाइन पर लगे भारी राजकीय शुल्क को घटाए.

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पिछले महीने भारत की आठ वाइन कम्पनियों ने पहली बार अपनी वाइन लन्दन के अन्तराष्ट्रीय वाइन फेस्टिवल में प्रदर्शित की थी. जल्द ही भारत पहला एशियाई देश होगा, जो पेरिस के वाइन की माननीय संगठन में शामिल होगा. यूनाइटेड ब्रेवरीज ने भी अपनी वाइन ब्रिटेन में भेजने की घोषणा की है. और इटली के वाइन बनाने वालों ने भी एक स्थानीय कम्पनी के साथ व्यापार करने का फैसला किया है.

भारत का वाइन बाजार अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है लेकिन वह विकास की ओर जरूर बढ़ रहा है. व्यापारी अंकुश मित्तल का मानना है कि अब भारत के बाजार में भी वाइन के अच्छे खिलाड़ी हैं और अब भारत से श्रेष्ठ वाइन की उम्मीद की जा सकती है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/जैसू भुल्लर

संपादन: एस गौड़

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