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दुनिया

भारत में बाघों की आबादी बढ़ी

भारत में बाघों की तादाद बढ़ी है. पिछले चार वर्षों में भारत में बाघों की संख्या में 30 फीसदी की वृद्धि हुई है. दुनिया में अब सिर्फ 3,200 बाघ बचे हैं और उनमें आधे से ज्यादा भारत में हैं.

बाघों की गिनती करने वाले अधिकारियों का कहना है कि 2010 में भारत में 1,706 बाघ थे लेकिन अब उनकी संख्या बढ़कर 2,226 हो गई है. तेज आर्थिक विकास चाह रहा भारत जंगली जानवरों के अवैध शिकार के अलावा जंगलों के कम होने और जंगली जानवरों के रहने की जगह खत्म होने की समस्या का भी सामना कर रहा है. उसने विलुप्त होने के खतरे में पड़े जानवरों को शिकारियों और तस्करों से बचाने के लिए अभियानों में तेजी ला दी है.

भारत के पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गणना की रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा है, "पूरी दुनिया में बाघ की आबादी गिर रही है, लेकिन भारत में बढ़ रही है. यह बड़ी कामयाबी है." बाघों की संख्या में वृद्धि के लिए देश के 40 टाइगर रिजर्वों में बेहतर प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. जावड़ेकर ने कहा कि सरकार बाघों और गांव वालों के बीच खूनी संघर्ष को कम करने की कोशिश कर रही है. बढ़ती आबादी के पालन पोषण के लिए किसान जंगलों को काट रहे हैं और जंगल में रहने वाले जानवर जिनमें बाघ भी हैं, खाना और पानी की तलाश में संरक्षित वन क्षेत्रों से बाहर निकल रहे हैं.

दुनिया भर में तेजी से घटते बाघों का आधा से ज्यादा हिस्सा भारत में रहता है. एक अनुमान के अनुसार सौ साल पहले दुनिया में 1,00,000 से ज्यादा बाघ थे जो अब 3,200 ही रह गया है. भारत ने राष्ट्रीय पशु की रक्षा के लिए कार्यक्रम शुरू किए हैं ताकि उन्हें विलुप्त होने से बचाया जा सके. बाघों की गिनती के लिए 9,700 कैमरे लगाए गए थे. अधिकारियों के मुताबिक बाघों की आबादी वाले 18 राज्यों में 378,000 वर्ग किलोमीटर इलाके में सर्वेक्षण किया गया. यहां बाघों की 1540 तस्वीरें ली गईं. देश में कर्नाटक, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और केरल में बाघों की संख्या बढ़ी है. इसके बावजूद भारत अभी भी 2002 के 3,700 के आंकड़े को छू नहीं पाया है. अनुमान है कि भारत की आजादी के समय 1947 में देश में बाघों की संख्या 40,000 के करीब थी.

भारत में हर चार साल पर बाघों की संख्या का आकलन किया जाता है. बेहतर सुरक्षा की वजह से टाइगर रिजर्वों में बाघों के प्रजनन के मामलों में वृद्धि हुई है. भारत के राष्ट्रीय टाइगर संरक्षण एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि पिछले सालों में भारत ने बाघों की गिरती संख्या को रोकने के प्रयास बढ़ाए हैं. अधिकारियों ने पूरे एशिया में शिकारियों के खिलाफ अभियान चला रखा है जो बाघों के शरीर के हिस्सों को चीन के परंपरागत दवा उद्योग को भारी दाम पर बेच देते हैं.

एमजे/ओएसजे (एएफपी, डीपीए)


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