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खेल

भारत में फुटबॉल की नई जिंदगी

अनेल्का, ट्रेजेगे, पियेरो, और पीरिस जैसे नाम 21वीं सदी की शुरुआत में चैंपियंस लीग के चयन के दौरान सुनाई देते थे. ये सभी अपना जलवा फुटबॉल के मैदान पर दिखा चुके हैं. अब इन्हें एक और चीज साथ लाई है और वह है इंडियन सुपर लीग.

खेल के मैदान के बीते दिनों के सितारों के बीच जर्मन खिलाड़ी मानुएल फ्रीडरिष भी इंडियन सुपर लीग का हिस्सा हैं. मानुएल फ्रीडरिष जर्मनी के बोरुसिया डॉर्टमुंड के लिए खेल चुके हैं. फ्रीडरिष ने अपने करियर की शुरुआत वैर्डर ब्रेमन और माइंस के फुटबॉल क्लबों के साथ की. फ्रीडरिष ने फिर बायर लेवरकूजेन और बोरुसिया डॉर्टमुंड के लिए कुछ दिनों तक खेला और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ दोस्ताना मैचों में जर्मन टीम का हिस्सा बने. फ्रीडरिष कुल नौ बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं. 34 साल के फ्रीडरिष मुंबई सिटी फुटबॉल क्लब के लिए डिफेंडर के तौर पर खेल रहे हैं. फ्रीडरिष कहते हैं, "मैं डेढ़ साल पहले ही एशिया में जाना चाहता था. लेकिन यह पहला ऐसा ऑफर है जिसको देखकर मुझे लगा कि इसके पीछे जो लोग हैं वह काफी प्रेरित हैं. तथ्य ये भी है कि यह पूरी तरह से नया टूर्नामेंट है और इसका मुख्य उद्देश्य भारत में फुटबॉल को अधिक आकर्षक बनाने का है, ऐसे में जब यह खेल देश में नंबर एक खेल नहीं है. मैं पूरे अनुभव से बहुत ही प्रभावित हूं."

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नई लीग, सितारे पुराने

फ्रीडरिष का नया क्लब उन आठ फ्रेंचाइजी टीमों में शामिल है जो इंडियन सुपर लीग में भाग ले रही है. इनके नाम एटलेटिको डी कोलकाता, दिल्ली डायनामोज, केरल ब्लास्टर्स जैसे शानदार हैं. हर टीम का नेतृत्व दुनिया भर में प्रसिद्ध "फुटबॉल लेजेंड" कर रहे हैं. इसके अलावा हर टीम में सात विदेशी खिलाड़ी और 14 भारतीय खिलाड़ी शामिल हैं. इन टीमों के ज्यादातर मालिक मुख्यता पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी, बॉलीवुड के सुपरस्टार और बड़े उद्योगपति हैं. इसमें कोई शक नहीं कि हाल में शुरू हुई आईएसएल असाधारण है, इसे कम समय में मार्केटिंग कंपनी आईएमजी और ऑस्ट्रेलियाई मीडिया सम्राट रुपर्ट मर्डोक ने तैयार किया है. मर्डोक का एक खेल चैनल भारत में काफी लोकप्रिय है. इन कंपनियों को भारत में विशाल व्यापार का अवसर नजर आता है.

बाजार पर नजर

एक अनुमान के मुताबिक आठ करोड़ भारतीय नियमित रूप से टीवी पर खेल देखते हैं, लेकिन वह ज्यादातर यूरोपियन चैंपियनशिप देखते हैं न कि भारतीय फुटबॉल, नई आईएसएल भारतीयों में स्थानीय फुटबॉल के प्रति प्यार को बढ़ाना चाहती है. 2007 से ही भारत में एक और लीग है, इस पेशेवर फुटबॉल लीग का नाम आई लीग है. हालांकि यह अप्रासंगिकता का सामना कर रही है. मोहन बागान और ईस्ट बंगाल जैसे टीमों के मुकाबलों में ही हजारों लोगों की भीड़ मैच देखने स्टेडियम जाती है. लेकिन देश के अन्य भागों में स्थिति बहुत ही गंभीर है, स्टेडियम में मैच देखने बहुत ही कम लोग जाते हैं. इसके अलावा भारत की राष्ट्रीय टीम फीफा रैंकिंग में 158वें स्थान पर है. पिछले कुछ साल में भारतीय फुटबॉल में चीजें बदल रही हैं. मुंबई सिटी एफसी के मैनेजर अरुणवा चौधरी के मुताबिक, "भारतीय फुटबॉल संघ क्षेत्रीय और उच्च स्तर की अकादमियां स्थापित करने पर काम कर रहा है. इंडियन सुपर लीग की फ्रेंचाइजी भी अपना कार्यक्रम जमीनी स्तर पर शुरु कर रही है. बच्चों के पास नियमित रूप से फुटबॉल खेलने का मौका रहेगा."

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