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दुनिया

भारत में पहली ट्रांसजेंडर कॉलेज प्रिंसिपल

भारत में पहली बार एक ट्रांसजेंडर मानवी बनर्जी को पश्चिम बंगाल की एक महिला कॉलेज का प्रिंसिपल चुना गया है. वह अगले महीने नदिया जिले के कृष्णनगर वुमेंस कॉलेज में अपना पद संभालेगी.

एक ट्रांसजेंडर को इस पद पर चुनने के फैसले की हर तरफ सराहना की जा रही है. मानवी का चयन कॉलेज सेवा आयोग के जरिए हुआ है. दूसरी ओर, मानवी ने कहा है कि उनको यह पद अपनी योग्यता से मिला है. फिलहाल वह पश्चिम मेदिनीपुर के एक कॉलेज में पढ़ाती है. मानवी बताती हैं कि उन्होंने महिला वर्ग के तहत इस पद के लिए आवेदन किया था. लेकिन इंटरव्यू के समय उन्होंने देखा कि उनको किन्नर वर्ग में रखा गया है. यह पद आरक्षित नहीं होने की वजह से मानवी को दूसरे उम्मीदवारों के साथ कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा.

मानवी कहती हैं, "अपने घर के करीब होने की वजह से मैंने इस पद के लिए आवेदन किया था." मानवी के 92 साल के पिता कॉलेज से कोई 80 किमी दूर नैहाटी में रहते हैं. औपचारिक रूप से ज्वायन करने से पहले मानवी कॉलेज और उसके आधारभूत ढांचे का मुआयना करने के लिए कृष्णनगर कॉलेज का दौरा किया. एक सवाल पर वह कहती है कि इंटरव्यू के दौरान भी उसके साथ कोई भेदभाव नहीं बरता गया और न ही उसके लिंग पर कोई सवाल उठाए गए.

चौतरफा सराहना

मानवी के चयन की चौतरफा सराहना हो रही है. कल्याणी विश्वविद्यालय, जिससे कृष्णनगर कॉलेज संबद्ध है, के वाइस-चांसलर रतन लाल हांगू कहते हैं, "हम इस फैसले का स्वागत करते हैं. मानवी एक बेहतरीन इंसान के साथ, बेहतर शिक्षाविद् और योग्य प्रशासक हैं." उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से किन्नर समुदाय के दूसरे सदस्यों के सशक्तिकरण में सहूलियत होगी. शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी कहते हैं, "हमने चयन की प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं किया. मानवी को उनकी योग्यता के आधार पर इस पद के लिए चुना गया है."

मानवी के चयन से कॉलेज के छात्र और प्रोफेसर भी खुश हैं. असिस्टेंट प्रोफेसर जयश्री मंडल कहती हैं, "मानवी एक योग्य इंसान हैं. हमें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि वह ट्रांसजेंडर हैं." कृष्णनगर कॉलेज में प्रिंसिपल का पद लंबे अरसे से खाली पड़ा था. एक छात्रा ज्योत्सना कहती है, "हमने उनके बारे में काफी सुना है. उनका प्रिंसिपल के तौर पर यहां आना हमारा सौभाग्य है."

सोशल मीडिया पर बधाई

मानवी के प्रिंसिपल चुने जाने की खबर के बाद फोन और सोशल नेटवर्क साइटों पर उनको बधाई देने वालों का तांता लग गया. राज्य का किन्नर तबका भी इससे खुश है. एक किन्नर मोहिनी कहती है, "यह पूरे समुदाय के लिए गर्व की बात है. इससे साबित होता है कि मन में लगन हो तो कुछ भी असंभव नहीं है. मानवी दीदी हमारे लिए प्रेरणा की स्त्रोत हैं." लेकिन एक सामाजिक कार्यकर्ता मोहन चटर्जी कहते हैं, "मानवी की यह उपलब्धि किन्नर समुदाय के लिए भले गर्व की बात हो, इससे इस तबके का खास भला नहीं होगा." उनके मुताबिक, इसकी वजह यह है कि किन्नर तबके के लोग उन हालातों से नहीं जूझना चाहते जिनसे गुजर कर मानवी इस मुकाम तक पहुंची है.

मानवी भी मानती हैं कि किन्नर तबके के समक्ष काफी समस्याएं हैं. अभी उनके विकास के लिए काफी कुछ करना बाकी है. किन्नर समुदाय में शिक्षा के प्रति ललक पैदा करनी होगी. वह कहती हैं, "पहले लोगों का नजरिया बदलना होगा. इसके साथ ही किन्नरों के प्रति उनके माता-पिता और समाज के रवैए में बदलाव जरूरी है." मानवी कहती है, "कॉलेज प्रिंसिपल के पद पर मेरा चयन देश में किन्नर आंदोलन के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. लेकिन मेरी पहली प्राथमिकता छात्र हैं."

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