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विज्ञान

भारत में चलते फिरते ब्लड बैंक

भारत के अलग अलग शहरों में अब चलते फिरते ब्लड बैंक बनाए जा रहे हैं. हाई टेक तकनीक से लैस खास तरह की बसें रक्तदान करने वाले लोगों से आसानी से खून लेकर जरूरतमंद लोगों तक तक पहुंचाएंगी.

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राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण सगंठन (नैको) ने राज्यों के लिए खास बसें बनाई हैं जिनमें हर ब्लड ग्रुप का खून उपलब्ध होगा. एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा लागत में तैयार ऐसी बस में लोगों को सलाह देने की सुविधा होगी. साथ ही खून का परीक्षण और खून को सुरक्षित रखने के लिए उच्च तकनीक भी इसमें होगी.

हर बस में एक साथ चार लोगों के रक्तदान की व्यवस्था है. बसों में डॉक्टरों के अलावा अन्य प्रशिक्षित लोग भी नियुक्त किए जाएंगे. एक बस में 300 बैग रक्त सुरक्षित रखा जा सकता है. एक बैग में करीब 450 मिलीलीटर खून आता है. डॉक्टरों का मानना है कि आधे लीटर खून से करीब तीन लोगों की जान बच सकती हैं. इन खास बसों में बेहतरीन तकनीक के जरिए खून देने और लेने में संक्रमण यानी बीमारियों को भी कम किया जा सकता है.

केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 32 बसें खरीदी हैं. भारतीय अस्पतालों में खून की जरूरत बढ़ रही है. महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में एक से ज्यादा चलते फिरते ब्लड बैंक तैनात की जाएंगी. जानकारों का मानना है कि भारत को सालाना 85 लाख यूनिट खून की जरूरत है. इस वक्त भारत में केवल 65 लाख यूनिट खून रखने की जगह है.

रिपोर्टः पीटीआई/एमजी

संपादनः ए कुमार

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