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ताना बाना

भारत में आसान हुई 3 जी की राह

भारत सरकार ने निजी क्षेत्र के लिए 3 जी मोबाइल सेवा मुहैया कराने के नियमों में ढील दे दी है. सरकार ने इसके लिए लाइसेंस नीति में संशोधन कर 3 जी स्पेक्ट्रम का दायरा बढ़ा दिया.

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नए नियमों के तहत निजी क्षेत्र के मोबाइल ऑपरेटर 3 जी सर्विस के स्पेक्ट्रम का 20 साल तक इस्तेमाल कर सकेंगे. इस अवधि में कंपनी का टेलीकॉम लाइसेंस खत्म होने के बावजूद वह 20 साल तक 3जी स्पेक्ट्रम का अबाध रूप से इस्तेमाल कर सकेगी.

संशोधित नियम बुधवार से लागू कर दिए गए है. इसके तहत सर्विस प्रोवाइडर को अगले पांच सालों में उसके नेटवर्क दायरे में आने वाले महनगरों में कम से कम 90 प्रतिशत सर्विस एरिया को कवर करना होगा.

इस शर्त का पालन न कर पाने की स्थिति में कंपनी को एक साल की मोहलत दी जाएगी लेकिन उसे इसके लिए हर तिमाही में कुल लाईसेंस फीस का 2.5 प्रतिशत देना होगा. इसके अलावा दो कंपनियों के विलय की स्थिति में नई कंपनी किसी एक स्पेक्ट्रम का ही इस्तेमाल कर सकेगी.

भारत में निजी क्षेत्र को 3जी सर्विस मुहैया कराने का अधिकार इस साल मई में ही दिया गया है. इससे पहले तक सार्वजनिक क्षेत्र की बीएसएनएल और एमटीएनएल के पास ही इसका लाइसेंस था. निजी क्षेत्र के लिए 3जी सर्विस के दरवाजे खुलने के बाद अब रिलायंस, आइडिया, भारती एयरटेल, वोडाफोन, टाटा, एयरसेल और एसटेल आवंटित एरिया में सेवा मुहैया करा सकेंगे.

रिपोर्टः पीटीआई/निर्मल

संपादनः आभा एम

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