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दुनिया

भारत में अमेरिका की राजनीतिक जासूसी

भारत में एक बार फिर से राजनीतिक नेताओं की अमेरिकी जासूसी वाला मामला तेज हो गया है. केंद्र सरकार ने इस मामले में अमेरिकी दूत को समन किया है. यह तीसरा मौका है कि भारत ने इस मामले में अपनी शिकायत दर्ज की है.

अब पता चला है कि अमेरिका ने सत्ताधारी पार्टी यानि बीजेपी के नेताओं की भी जासूसी की. विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, "हमने बताया है कि हमें एक जवाब का इंतजार रहेगा और हमें यह भरोसा भी चाहिए कि ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए."

अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने एक खुफिया दस्तावेज का खुलासा किया है, जिसके अनुसार नरेंद्र मोदी सहित सत्ताधारी बीजेपी के नेताओं की 2010 में जम कर जासूसी हुई. हालांकि उस वक्त बीजेपी विपक्ष में थी. इससे पहले भारत ने जुलाई और नवंबर, 2013 में भी अमेरिका को शिकायत की है कि उसके लोगों की जासूसी हुई है. इनमें न्यूयॉर्क में भारत के स्थायी दूत का नाम भी लिया गया है, जिनकी जासूसी हुई.

NSA-Hauptquartier in Fort Meade (Maryland)

एनएसए पर लगा जासूसी का आरोप

भारत को जवाब चाहिए

दोनों ही बार अमेरिका ने कहा है कि वह इस मामले पर नजर डालेगा, हालांकि इसका कोई नतीजा नहीं निकल पाया है. भारतीय मंत्रालय के सूत्र का कहना है, "हमने कहा है कि हमें जवाब चाहिए, जो हमें अब तक नहीं मिला है." यह वाकया ऐसे वक्त में हुआ है, जब अमेरिका के वरिष्ठ नेता जॉन मैकेन भारत का दौरा कर रहे हैं. इसके बाद मोदी सितंबर में अमेरिका का दौरा करेंगे. वहां वह संयुक्त राष्ट्र के सालाना समारोह में शामिल होने के अलावा राष्ट्रपति बराक ओबामा से भी मुलाकात करेंगे.

मैकेन भारत के दौरे पर हैं और उन्होंने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ मुलाकात की. लेकिन इसके बाद तय संवाददाता सम्मेलन को टाल दिया क्योंकि तभी प्रेस में यह बात आ गई कि भारतीय नेताओं की जासूसी की गई है.

वॉशिंगटन पोस्ट में छपी खबर के मुताबिक अमेरिका ने 2010 में जिन छह विदेशी पार्टियों की जासूसी का काम अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी एनएसए को जिम्मा दिया था, उनमें मिस्र की मुस्लिम ब्रदरहुड के अलावा भारत की बीजेपी भी शामिल थी. इस बात का खुलासा एडवर्ड स्नोडेन के दस्तावेजों से हुआ है.

बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी का कहना है, "हमने इस बात को नोटिस में लिया है कि एक विदेशी खुफिया एजेंसी ने बीजेपी की जासूसी की है और यह ठीक नहीं है. हमारी सरकार इस मसले पर नजर रखे हुए है और अनुकूल कार्रवाई करेगी."

भारत में अमेरिका का राजदूत बदलने वाला है और ऐसे में कूटनीतिक दिक्कतें भी हैं. दिसंबर में अमेरिका में भारत की एक राजनयिक को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद दोनों देशों के रिश्ते खराब हुए और वे अभी भी बहुत अच्छे नहीं हुए हैं.

एजेए/एएम (एएफपी)

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