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ताना बाना

भारत में अब रक्षा विश्वविद्यालय

रक्षा व स्ट्रैटेजिक सवालों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत में पहली बार एक रक्षा विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय लिया गया है. 1999 के कारगिल संघर्ष के बाद से ही ऐसे एक संस्थान की ज़रूरत महसूस की जा रही थी

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिह के नेतृत्व में कैबिनेट की बैठक में इस सिलसिले में सैद्धांतिक निर्णय किया जा चुका है. दिल्ली के नज़दीक इस विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी, जिसका नाम होगा इंडियन नेशनल डिफ़ेंस यूनिवर्सिटी (इंडु). केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने इस सिलसिले में पत्रकारों को जानकारी दी है.

गुड़गांव के बिनोला में 200 एकड़ ज़मीन पर बनाए जाने वाले इस विश्वविद्यालय की स्थापना का प्राथमिक खर्च तीन अरब रुपये आंका गया है. ज़मीन के अधिग्रहण के लिए 1 अरब रुपये की धनराशि तय की गई है.

भारत में इस वक्त कई रक्षा संस्थान है, जिनमें से प्रमुख हैं नई दिल्ली का नेशनल डिफ़ेंस कॉलेज, सिकंदराबाद का कॉलेज ऑफ़ डिफ़ेंस मैनेजमेंट, वेलिंगटन का नेशनल स्टाफ़ कॉलेज या पुणे की नेशनल डिफ़ेंस अकादमी. अब तक ये संस्थान अलग अलग विश्वविद्यालयों से संबद्ध रहे हैं. अब इन सारे संस्थानों को नए विश्वविद्यालय के अधीन लाया जाएगा.

अंबिका सोनी ने कहा कि इंडु दीर्घकालीन रक्षा व स्ट्रैटेजिक अध्ययन पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा और इसके ज़रिये शैक्षणिक क्षेत्र व सरकारी संस्थानों के बीच तालमेल बैठाया जाएगा.

एक संसदीय अधिनियम के ज़रिए इस विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी. यह पूरी तरह से स्वशासित होगा तथा यहां राष्ट्रीय स्ट्रैटेजिक नीति के अंग के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा के सभी पक्षों पर शोध किए जाएंगे.

कारगिल संघर्ष के बाद सरकार की ओर से एक सर्वेक्षण समिति बनाई गई थी. जाने माने स्ट्रैटेजिक विशेषज्ञ के सुब्रह्मण्यम जिसके अध्यक्ष थे. इस समिति की सिफारिश पर ही इस विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय किया गया है.

समिति ने साथ ही सुझाव दिया है कि स्ट्रैटेजिक सुरक्षा नीति व उससे संबंधित सवालों के सिलसिले में शिक्षा जगत, सेना, अर्धसैनिक बल, गुप्तचर सेवाओं और प्रशासन के बीच तालमेल बैठाया जाए.

रिपोर्ट: पीटीआई/उभ

संपादन: ए जमाल

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