1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

भारत बांग्लादेश विवाद पर सुनवाई

भारत और बांग्लादेश के समुद्री विवाद पर द हेग की मध्यस्थता अदालत में सुनवाई शुरू हुई. माना जाता है कि बंगाल की खाड़ी से दूर समुद्र के भीतर तेल और गैस का भंडार है, विवाद इसी इलाके के स्वामित्व का है.

अंतरराष्ट्रीय विवादों की सुनवाई करने वाले परमानेंट कोर्ट ऑफ ऑर्बिट्रेशन (पीसीए) में सुनवाई सोमवार को शुरू हुई. भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक 18 दिसंबर तक पीसीए के सामने मौखिक सुनवाई होगी. इस दौरान भारत सरकार के अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती भारत का पक्ष रखेंगे.

आठ अक्टूबर 2009 को बांग्लादेश ने संयुक्त राष्ट्र के समुद्री नियम समझौते का हवाला देते हुए भारत के खिलाफ सुनवाई की अपील की थी. मई 2011 में ढाका ने इस संबंध में लिखित दस्तावेज जमा कराए. दस्तावेजों में सभी तरह के समुद्री जोन के कागजात हैं. इनमें समुद्री जल सीमा, एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन, कॉन्टिनेंटल शेल्फ और बाहरी कॉन्टिनेंटल शेल्फ से जुड़े दस्तावेज हैं.

समुद्र के नियम

एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन के तहत समुद्री सीमा से बाहर 12 नॉटिकल मील से 200 नॉटिकल मील दूर तक का इलाका आता है. इस इलाके के मालिक देश को वहां मछली मारने, खोज करने, संसाधन खोजने और दूसरे कई अधिकार होते हैं. वहीं कॉन्टिनेंटल शेल्फ तट से समुद्र की गहराई की तरफ हल्के से झुकने वाले इलाके से शुरू होता है और कई नॉटिकल मील दूर समुद्र के भीतर की बेहद तीखी ढलान पर खत्म होता है. अति गहराई की तरफ बढ़ने वाली तीखी ढलान के बाद आगे समतल सी सतह आती है उसे आउटर कॉन्टिनेंटल शेल्फ कहा जाता है. आउटर कॉन्टिनेंटल शेल्फ तय करने के लिए पानी का दबाव भी मापा जाता है.

ढाका के दावे के मुताबिक 200 नॉटिकल मील तक एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन होने का मतलब है कि भारत, बांग्लादेश और म्यांमार के तटों से काफी दूर समुद्र के बीचों बीच के एक समुद्री इलाके पर उसका हक है. बांग्लादेश की तरफ से दायर इस विवाद का जवाब भारत ने 2012 में दिया. पीसीए के आग्रह पर भारत ने अपने दस्तावेज जमा किए.

संसाधनों के लिए होड़

माना जाता है कि बंगाल की खाड़ी के आस पास समुद्र में तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार है. मुश्किल यह है कि भारत, बांग्लादेश और म्यांमार मिलकर बंगाल की खाड़ी में एक त्रिकोण बनाते हैं. इस त्रिकोण का केंद्र तीनों देशों से करीब करीब बराबर दूरी पर है, विवाद इसी पर केंद्रित है. इस इलाके में भारत और बांग्लादेश के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन एक दूसरे को ढंक रहे हैं. बांग्लादेश का ऐसा ही विवाद म्यांमार के साथ भी था. मार्च 2012 में आए उस विवाद के फैसले में बांग्लादेश को कामयाबी मिली.

दोनों देशों ने द्विपक्षीय कोशिशों के जरिए भी इस विवाद को सुलझाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली. ऐसे में माना जा रहा है कि यह सुनवाई भी भारत और बांग्लादेश के बीच चल रहे समुद्री सीमा विवाद में अहम साबित होगी.

ओएसजे/एमजे (पीटीआई)

DW.COM

संबंधित सामग्री