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दुनिया

भारत पाक रिश्तों के लिए ठंडा रहा 2010

2010 भारत पाकिस्तान रिश्तों के लिए बेहद ठंडा साल रहा. पाकिस्तान में मुंबई हमलों के संदिग्धों पर मुकदमे में कोई खास प्रगति न होना और दोनों देशों की समग्र बातचीत को बहाल करने में नाकामी इसकी खास वजह रही.

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अमेरिका के साथ पाकिस्तान के रिश्तों में भी इस साल तनाव देखा गया. खासकर विकीलीक्स की तरफ से हुए खुलासों से दोनों पक्षों की खासी किरकिरी हुई. लेकिन अमेरिका ने पाकिस्तान पर बराबर इस बात का दबाव बनाए रखा कि वह अपने सरहदी इलाकों में आतंकवादी पनाहगाहों को खत्म करे.

मुंबई हमलों के बाद रुकी पड़ी समग्र वार्ता के 18 महीने बाद भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों की जुलाई में इस्लामाबाद में बातचीत हुई. लेकिन दोनों देशों के विदेश सचिवों की बैठक बिना खास नतीजे के खत्म हो गई. खासकर बातचीत में पाकिस्तान कश्मीर समेत सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए एक फ्रेमवर्क की मांग पर अड़ा रहा. भारत की तरफ से कहा गया कि समग्र वार्ता की बहाली सीधे तौर पर मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई से जुड़ी है.

Indien Pakistan Gespräche

भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव और पाक विदेश सचिव सलमान बशीर

भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने पाकिस्तानी विदेश शाह महमूद कुरैशी को आगे की बातचीत के लिए भारत के दौरे पर आमंत्रित किया, लेकिन अब यह बैठक अगले साल ही कभी होगी. कुरैशी का कहना है कि वह तभी भारत जाएंगे जब बातचीत की कोई नतीजा निकले.

उधर पाकिस्तानी जांचकर्ताओं ने मुंबई हमलों के सिलसिले में सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया जिनमें लश्कर-ए-तैयबा का ऑपरेशन कमांडर जकी उर रहमान लखवी भी शामिल है. उनके खिलाफ रावलपिंडी की आतंकवाद निरोधक अदालत में मुकदमा चल रहा है. लेकिन हमलों के दौरान पकड़े गए इकलौते आतंकवादी अजमल आमिर कसाब की गवाही के मामले पर मुकदमे में ठहराव आ गया है. कसाब, न्यायिक अधिकारियों और पुलिस से पूछताछ के लिए पाकिस्तानी अयोग के दौरे को भारत ने अभी तक अनुमित नहीं दी है.

वहीं दो साल पहले पाकिस्तान में चुनी हुई सरकार के गठन के बाद पाकिस्तानी सेना देश की विदेश नीति को तय करने में बदस्तूर अहम भूमिका निभा रही है. इस साल पत्रकारों कें साथ बातचीत में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल अश्फाक परवेज कियानी ने साफ कर दिया कि उनकी सेना "भारत केंद्रित" ही बनी हुई हैं, भले ही तालिबान और अल कायदा जैसे संगठनों की तरफ से पाकिस्तान को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा हो.

पाकिस्तान और अमेरिका की सामरिक वार्ता से पहले कियानी ने संघीय सचिवों की एक बैठक बुलाई और विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से भी उन्होंने मुलाकात की ताकि बातचीत का एजेंडा तय किया जा सके. सेना ने अमेरिका से यह भी कह दिया कि अफगानिस्तान में भारत की बढ़ती भूमिका पर वह चिंतित है. सुरक्षा प्रतिष्ठान और विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिका पर इस बात के लिए दबाव बनाए रखा कि उसके साथ भारत की तरह असैनिक परमाणु समझौता होना चाहिए. पाकिस्तान के मुताबिक यह दक्षिण एशिया में ताकत के संतुलन के लिए जरूरी है.

विदेश मंत्रालय ने उस वक्त कड़ी नाराजगी जताई जब ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने नेताओं ने आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए पाकिस्तान से और कदम उठाने को कहा. वहीं पश्चिमी जगत बार बार पाकिस्तान से कहता रहा कि वह अपने कबायली इलाकों में आंतकवादियों की सुरक्षित पनाहगाह बन चुके इलाकों में कार्रवाई करे. खास कर एक पूर्व पाकिस्तानी एयर फोर्स के अधिकारी के बेटे फैसल शहजाद के न्यूयॉर्क में नाकाम कार बम हमले के बाद इस तरह का दबाव और बढ़ गया. खुफिया अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान के अशांत कबायली इलाकों में मौजूद तत्व यूरोपीय शहरों में हमलों की योजना बना रहे हैं.

पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान ने उत्तरी वजीरिस्तान में कार्रवाई करने का कोई इरादा जाहिर नहीं किया. उनका कहना है कि जब तक वह दूसरे मोर्चों पर स्थिति को काबू नहीं कर लेते, अन्य जगहों पर अभियान नहीं छेड़ेंगे. वह अमेरिका के अफगानिस्तान छोड़ जाने के बाद ताकतवर हक्कानी गुट को अफगानिस्तान के समाधान का हिस्सा मानता है.

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने 2010 में अफगान तालिबान के नेता मुल्ला ब्रादर को गिरफ्तार किया, जो बातचीत के लिए अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई के संपर्क में समझा जाता था. कुछ जानकार मानते हैं कि पाकिस्तान ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि अफगानिस्तान को लेकर कोई भी समझौता उसके बिना नहीं हो सकता.

पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान और उच्च राजनीतिक नेतृत्व को उस वक्त धक्का भी लगा जब विकीलीक्स ने अमेरिकी गोपनीय राजनयिक संदशों को उजागर किया. इनमें कई बातें कबायली इलाकों में होने वाले संदिग्ध अमेरिकी ड्रोन हमलों से जुड़ी हैं जिनके बारे में पाकिस्तानी सरकार सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जताती रही है. लेकिन विकीलीक्स के मुताबिक सरकार ने अमेरिका से इस बारे में गोपनीय समझौता कर रखा है. एक अन्य संदेश के मुताबिक जनरल कियानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को हटाने की फिराक में थे.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः वी कुमार

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