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जर्मन चुनाव

भारत पाकिस्तान में बात चलती रहेः अमेरिका

अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान और भारत में बातचीत का सिलसिला जारी रहे, ताकि दोनों पक्ष आपसी मुद्दों को वार्ता के जरिए हल कर सकें. अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने अमेरिका की यह बात पाकिस्तान सरकार तक पहुंचा दी है.

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पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अपने साथ भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा की बातचीत का ब्योरा अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को भी दिया. क्लिंटन अमेरिका पाकिस्तान रणनीतिक वार्ता के लिए इस्लामाबाद में हैं. भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की बातचीत 15 जुलाई को हुई थी, जो बेहद तल्ख अंदाज में खत्म हुई.

Außenminister von Indien und Pakistan Somanahalli Mallaiah Krishna und Shah Mehmood Qureshi

तल्खी के साथ खत्म हुई बातचीत

समाचार एजेंसी पीटीआई ने पाकिस्तान के एक कूटनीतिक के हवाले से रिपोर्ट दी है, "अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस बात को साफ कर दिया है कि अमेरिका चाहता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत चलती रहे." पाकिस्तान प्रतिनिधिमंडल ने क्लिंटन को बताया कि क्यों पाकिस्तानी पक्ष भारत के साथ हुई बातचीत को आगे नहीं बढ़ा पाया.

पाकिस्तान का कहना है कि भारत सिर्फ आतंकवाद के मुद्दे पर बात करना चाहता था और वह पाकिस्तानी मुद्दों को नजरअंदाज कर रहा था. वह सियाचिन और कश्मीर के मुद्दों पर भी बात नहीं करना चाहता था. पाकिस्तान का कहना है कि ऐसे में बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती है.

सूत्रों का कहना है कि इन बातों को सुनने के बाद क्लिंटन ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि भारत और पाकिस्तान दोनों सभी मुद्दों पर बातचीत करें ताकि इलाके में बेहतर स्थिति बन सके.

भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों एसएम कृष्णा और शाह महमूद कुरैशी में नोकझोंक के बीच दोनों देशों की बातचीत खत्म हुई थी. कुरैशी का आरोप था कि कृष्णा वार्ता के बीच टेलीफोन पर भारत बात कर रहे थे और वह सीमित मुद्दों के साथ इस्लामाबाद आए थे. वहीं कृष्णा ने इन बातों से इनकार किया और यह भी कहा कि उन्होंने बातचीत के दौरान टेलीफोन पर किसी से बात नहीं की. सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान कश्मीर, सियाचिन और दूसरे मुद्दों के लिए समय आधारित रोडमैप पर अड़ गया, जिसकी वजह से बातचीत नाकाम रही. भारत का कहना है कि वह मुंबई के आंतकवादी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ धीमी गति से रिश्ते बेहतर करने के लिए तैयार है.

रिपोर्टः पीटीआई/ए जमाल

संपादनः एन रंजन