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विज्ञान

भारत पर हो सकता है साइबर हमला

माइक्रोसॉफ्ट की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पर्सनल कंप्यूटरों पर हमला करने के लिए साइबर क्रिमिनल बोटनेट तैयार करने में लगे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा कंप्यूटरों पर नियंत्रण कर सकें.

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माइक्रोसॉफ्ट सिक्यूरिटी इंटेलिजेंस रिपोर्ट के नवें संस्करण में कहा गया है कि जून 2010 के अंत तक भारत 200 देशों की सूची में 25 वें नंबर है जहां के कंप्यूटरों में बोट का अटैक देखा गया और उसे हटाया गया. माइक्रोसॉफ्ट की इस रिपोर्ट में 200 देशों को कवर किया गया है. इस साल जून तक देश भर में 38,954 कंप्यूटर ऐसे पाए गए जिनमें बोटनेट ने घुसपैठ की. ये पिछले चौमाही से करीब एक हजार ज्यादा हैं.

बोटनेट कंप्यूटरों का एक ऐसा नेटवर्क है जो ऑटोमैटिक काम करता है, यह एक कंप्यूटर से चलता है. दूसरे कंप्यूटरों पर हमला करता है और उसे अपने नेटवर्क का हिस्सा बना लेता है. बोटनेट चलाने का मुख्य उद्देश्य है पहचान बनाना और आर्थिक लाभ. जितना बड़ा बोटनेट होगा उतनी बड़ी साइबर अपराधी की पहचान होगी.

बोटनेट का कंप्यूटर किसी तीसरी पार्टी को भी अपनी सेवाएं दे सकता है और वो स्पैम मेल भेजने के लिए. स्पैम मेल किसी भी कंप्यूटर को धीमा कर देते हैं और कभी कभी इन मेल में वायरस भी होता है जो अपने आप आपके कंप्यूटर में डाउनलोड हो जाता है और उसे खत्म कर सकता है या नुकसान पहुंचा सकता है.

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मुश्किल हो रही है सुरक्षा

चूंकि बोट नेट ने पहले से ही कंप्यूटर्स को अपने नेटवर्क में शामिल कर लिया होता है तो बहुत बड़ी मात्रा में स्पैम मेल्स जा सकती हैं.

भारत में माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य सुरक्षा अधिकारी संजय बहल कहते हैं, ये बात साफ है कि कंट्रोल करने वाले पूरी मेहनत करते हैं और आर्थिक फायदा बढ़ाने के लिए लगातार काम करते हैं. अगर एक उपभोक्ता की बात है तो शायद निजी डाटा और पैसे का उतना नुकसान नहीं हो लेकिन अगर हम सरकारी ऑफिस या अहम कार्यालयों के बारे में सोचें तो नुकसान बहुत ज्यादा है.

माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि स्पेम मेल्स के कारण 2008-09 में दुनिया भर में 78 करोड़ डॉलर यानी करीब 35 अरब रुपये का नुकसान हुआ.

कंप्यूटर मामलों के जानकार ओवम विश्लेषक ग्रैहम टिट्रिंगटन कहते हैं, साफ ही है कि बोटनेट का बनना गंभीर मुद्दा है. वैश्विक स्तर पर कंप्यूटरों में बढ़ते इनफेक्शन भी खतरनाक हैं. इस साल के रिपोर्ट का डाटा भी इंगित करता है कि साइबर अपराधी अब बोटनेट जैसी और जटिल तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं.

अब एक कंप्यूटर से पैदा होने वाली ज्यादा स्पैम की संख्या कम हो गई है लेकिन अब बहुत सारे कंप्यूटरों से कम स्पैम भेजे जा रहे हैं इस कारण स्पैम मेल्स को पहचानना मुश्किल हो रहा है.

भारत में इन हमलों की संख्या कम है लेकिन बढ़ रही है. बहल का कहना है, साइबर अपराधी संवेदनशील डाटा से छेड़छाड़ कर रहे हैं. "ब्राजील में लोग आजकल बहुत ज्यादा ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं और साइबर अपराधी इन आंकड़ों को स्पैम मेल से बड़ी लॉटरी या बैंक पेमेन्ट का वायदा करके हैक करने की कोशिश कर सकते हैं." ये स्थिति और गंभीर होने की संभावना है जब लोग मोबाइल पर भी इंटरनेट का इस्तेमाल भारी मात्रा में करने लगेंगे.

बहल ने जानकारी दी, "रिसर्च रिपोर्ट कहती है कि देश में बहुत सारे लोग पहली बार इंटरनेट उनके मोबाइल फोन से इस्तेमाल कर सकेंगे. ऐसी स्थिति में साइबर क्रिमिनल फोन को भी अटैक करने की कोशिश करेंगे. इस मुश्किल को हल करने के लिए रचनात्मक तरीके सोच और उद्योग, सरकार, कानून विदों की ओर से सहयोग चाहिए. सभी कंप्यूटरों पर सॉफ्टवेयर अपडेटट होते रहना चाहिए और जाना पहचाना एंटी वायरस भी."

रिपोर्टः पीटीआई/आभा एम

संपादनः ओ सिंह

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