1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

भारत पर मंडराता जीका का खतरा

लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील और आस-पास के इलाकों में कहर बरपाने वाला जीका वायरस भारत में भी कदम रख सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने देश को इस खतरे के प्रति आगाह किया है.

भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि अब तक भारत में ऐसा एक भी मामला सामने नहीं आया है. लेकिन इस खतरे के प्रति सतर्क रहना जरूरी है. सरकार ने इस वायरस से निपटने की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं. सबसे पहले वर्ष 1947 में बंदरों में इस वायरस का पता चला था. उसके बाद धीरे-धीरे अफ्रीकी और एशियाई महाद्वीप में इसने इंसानों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया. अब लंबे अरसे बाद यह लैटिन अमेरिकी देशों में दोबारा सामने आया है.

इस वायरस की वजह से कई विकृत शिशुओं के जन्म ने इसे और खतरनाक बना दिया है. एकाध मामलों में शारीरिक संबंधों के चलते भी इसके फैलने की पुष्टि हुई है. इस वायरस ने ब्राजील ओलंपिक पर भी खतरा पैदा कर दिया है और अमेरिका समेत कई देशों के खिलाड़ी रियो जाने से इंकार करने का मन बना रहे हैं. डब्ल्यूएचओ ने भारत को भी इस खतरे से आगाह करते हुए इससे निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है. उसके बाद सरकार भी इस मामले में सक्रिय हुई है.

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि देश के जिन इलाकों में पहले से ही डेंगू फैलता रहा है वहां इस वायरस के फैलने का खतरा सबसे ज्यादा है. इस वायरस के भारत पहुंचने की स्थिति में भारी समस्या पैदा हो जाएगी. यह भी उन मच्छरों के जरिए ही फैलता है जो डेंगू के लिए जिम्मेदार हैं. इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक हेल्थ के एसोसिएट प्रोफेसर रघुपति अंचला कहते हैं, "यह वायरस डेंगू की तरह तेजी से फैलने में सक्षम है." अपोलो अस्पताल में संक्रामक बीमारियों की विशेषज्ञ डा. सुनीता रेड्डी का कहना है, "भारत की घनी आबादी, मच्छरों की भरमार, ऐसी बीमारियों से निपटने के उपायों का अभाव और सरकार के साथ-साथ आम लोगों में साफ-सफाई के प्रति लापरवाही इसे लैटिन अमेरिकी देशों के मुकाबले कई गुना खतरनाक बना सकती है."

डा. रघुपति के मुताबिक, "इस वायरस के दोबारा सामने आने की वजहों के विस्तृत अध्ययन से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं है." वह लोगों को आतंकित नहीं होने की सलाह देते हैं. उनका कहना है कि खासकर गर्भवती महिलाओं को अपने खान-पान और स्वास्थ्य-संबंधी किसी समस्या का ध्यान रखना चाहिए. जिन देशों में यह वायरस फैला है वहां 20 फीसदी गर्भवती महिलाएं इसकी चपेट में हैं. विशेषज्ञों की राय में इस बीमारी से बचने के लिए वही ऐहतियाती उपाय जरूरी हैं जो मलेरिया व डेंगू जैसी मच्छर के जरिए फैलने वाली बीमारियों की स्थिति में अपनाए जाते हैं. इनमें घर या उसके आसपास कहीं भी गंदा पानी नहीं जमने देना और नियमित रूप से कीटनाशकों का छिड़काव शामिल है.

सरकार सतर्क

केंद्र सरकार इस मामले में पूरी तरह सतर्क है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा ने इसी सप्ताह दिल्ली में विभागीय अधिकारियों के साथ एक बैठक में स्थिति की समीक्षा की है. मंत्री व स्वास्थ्य सचिव तमाम राज्यों की स्थिति की निजी तौर पर निगरानी कर रहे हैं. वह दावा करते हैं कि भारत ऐसे खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. सरकार ने इस वायरस से बचाव के लिए एक विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया है. इसमें गर्भवती महिलाओं को प्रभावित इलाकों की अपनी यात्रा टालने या रद्द करने की सलाह दी गई है. इस बीमारी के खतरे से आगाह करने वाली साइनबोर्ड देश के तमाम एयरपोर्टों पर लगाए जा रहे हैं. उनका कहना है कि प्रभावित देशों से लौटने वाले यात्रियों से भी कस्टम विभाग को सूचित करने की सलाह दी गई है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि इस महीने के आखिर तक विभिन्न राज्यों में जीका वायरस का पता लगाने के लिए दस नए जांच केंद्र भी खोले जाएंगे. डब्ल्यूएचओ की सलाह पर प्रभावित देशों में आवाजाही करने वाले विमानों को भी कीटाणुमुक्त कर दिया गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि जीका से घबराने की जरूरत नहीं, बल्कि इससे बचाव के उपायों को गंभीरता से लागू करना जरूरी है. एक बार देश में आने के बाद यह भारी तबाही मचा सकता है. इस मामले में ‘इलाज से बचाव बेहतर' के सिद्धांत पर अमल सबसे जरूरी है.

DW.COM