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ताना बाना

भारत ने राजनयिक को सुरक्षा दीः ब्रिटेन

ब्रिटेन का दावा है कि पत्नी की पिटाई करने के आरोपी राजनयिक अनिल वर्मा को भारत ने सुरक्षा दी और ब्रिटेन सरकार के अनुरोध पर भी उनके राजनयिक अधिकारों को खत्म नहीं किया. बाद में भारत ने वर्मा को वापस बुला लिया.

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टेम्स नदी के तट पर ब्रिटिश संसद

समाचार एजेंसी पीटीआई ने ब्रिटेन के एक सरकारी सूत्र के हवाले से खबर दी है कि ब्रिटेन ने भारत सरकार से अपील की कि वह विवादित राजनयिक के विशेषाधिकार खत्म करे ताकि उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके या फिर उसका तबादला किया जाए ताकि भारतीय कानून से उस पर कार्रवाई हो सके. इसके बाद भारत ने दूसरा विकल्प चुना.

लंदन में विदेश और कॉमनवेल्थ ऑफिस के एक प्रवक्ता ने कहा, "हम इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि हमने औपचारिक तौर पर भारत से अनुरोध किया कि वह लंदन के भारतीय उच्चायोग में तैनात एक राजनयिक के विशेषाधिकार खत्म करे." उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय इस बात को हर्गिज बर्दाश्त नहीं कर सकता कि लंदन में काम कर रहा कोई भी व्यक्ति कानून को तोड़े.

उन्होंने कहा, "इसके अलावा ब्रिटिश विदेश विभाग के अधिकारियों ने लंदन में भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों से मुलाकात की और इस गंभीर मामले पर बातचीत की. दिल्ली में भी ब्रिटिश हाई कमीशन के अधिकारियों ने भारतीय विदेश मंत्रालय में बातचीत की."

पश्चिम बंगाल कैडर के 1986 बैच के आईएएस अधिकारी अनिल वर्मा लंदन में भारतीय उच्चायोग में तैनात तीसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं. वह आर्थिक मामलों के मिनिस्टर हैं. उन पर अपनी पत्नी प्रोमिला वर्मा की पिटाई का आरोप है. पिछले साल 11 दिसंबर को पड़ोसियों ने प्रोमिला को खून से लथ पथ पाया, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई.

जब पुलिस आई तो 45 साल के वर्मा ने कहा कि उन्हें राजनयिक होने के नाते विशेष संरक्षण हासिल है और इस तरह वह कार्रवाई से बच गए. सूत्रों का कहना है कि इसके बाद भारत सरकार ने वर्मा का तबादला भारत कर दिया और समझा जाता है कि उनके खिलाफ भारत में कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

1961 के वियना समझौते के तहत दूसरे देश में काम कर रहे राजनयिकों, उनके परिवार और बच्चों पर उस देश में कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती है.

मीडिया की रिपोर्टों में कहा गया है कि मामला सामने आने के बाद उनकी पत्नी अपने पांच साल के बच्चे के साथ डर के मारे कहीं कहीं छिप गई हैं. प्रोमिला ने आशंका जताई है कि उन्हें जबरदस्ती भारत ले जाने की कोशिश की जाएगी और उन्होंने ब्रिटेन सरकार से मानवीय आधार पर उन्हें वहीं रहने देने की इजाजत देने की अपील की है.

रिपोर्टः पीटीआई/ए जमाल

संपादनः एस गौड़

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