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जर्मन चुनाव

भारत डब्ल्यूटीओ में खींचेगा अमेरिका को!

भारत पेशेवर कर्मियों के लिए वीजा की फीस बढ़ाने के मुद्दे पर अमेरिका को विश्व व्यापार संगठन तक खींच सकता है. अमेरिका के इस नए "संरक्षणवादी" कानून के कारण भारत की कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में टिकना मुश्किल होगा.

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वीजा की फीस बढ़ाए जाने से भारतीय कंपनियों और खासकर आईटी पर सालाना 20 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है. भारत के वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर ने कहा कि भारत इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठ सकता. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को डब्ल्यूटीओ में उठाने पर गंभीरता से विचार हो रहा है.

अमेरिकी कदम का विरोध करते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉन किर्क को पत्र भी लिखा. पिछले हफ्ते लिखे गए इस पत्र में साफ किया गया है कि भारतीय कंपनियों पर वीजा फीस बढ़ाए जाने से 20 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.

खुल्लर ने कहा कि एच-1बी वीजा की फीस बढ़ाना संरक्षणवादी कदम है. इससे अमेरिकी हितों को भी नुकसान होगा. वह कहते हैं, "अगर अमेरिका खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए इस तरह के संरक्षणवादी कदम उठाता है, तो उठाए. लेकिन अगर मेरे व्यावसायिक हितों को नुकसान होता है तो मैं चुप नहीं बैठ सकता."

अमेरिका ने अगले पांच साल के लिए एच-1 बी और एल1 श्रेणी के वीजा की फीस बढ़ा दी है जिससे मिलने वाली राशि अमेरिकी सीमा सुरक्षा पर खर्च की जाएगी. अमेरिका का कहना है कि वीजा फीस बढ़ाने से उसे 55 करोड़ डॉलर की राशि मिलेगी जो अमेरिकी-मैक्सिको सीमा पर सुरक्षा बेहतर करने के लिए बनाए गए 65 करोड़ डॉलर के पैकेज में बड़ी मददगार साबित होगी.

अमेरिका में भी उद्योग जगत ने वीजा फीस बढ़ाने का विरोध किया है. अमेरिका चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स का कहना है कि नया कानून भारत के साथ निवेश संबंधों पर बुरा असर डालेगा.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः आभा एम