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दुनिया

भारत को न्यायसंगत जलवायु समझौते की उम्मीद

पेरिस पर्यावरण शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वे भारत को जलवायु परिवर्तन की लड़ाई में अगुआ बनाएंगे. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन भारत के लिए प्रमुख खतरा है.

'पर्यावरण न्याय' और 'साझा लेकिन अंतर के साथ जिम्मेदारियों' को भारत के लिए शामिल करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा, "जलवायु परिवर्तन ग्लोबल वॉर्मिंग का परिणाम है जो कि औद्योगिक युग में जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल के साथ आया. लेकिन हम इसके नुकसान अभी भी भुगत रहे हैं, और इसीलिए पेरिस शिखर सम्मेलन के नतीजे हमारे लिए अहम हैं, जिसके लिए हम आज यहां हैं.हम चाहते हैं कि विश्व इस पर तुरंत काम करे. समझौते से हमें मानवता और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलनी चाहिए. हम पेरिस में विस्तृत, न्यायसंगत और टिकाऊ समझौते की उम्मीद करते हैं."

पर्यावरण पर पेरिस में हो रहे शिखर सम्मेलन में 138 देशों के राज्य व सरकार प्रमुखों के अलावा दुनिया भर के 40,000 प्रतिनिधि, पत्रकार, पर्यवेक्षक और प्रदर्शक भाग ले रहे हैं. हाल में अमेरिका और फ्रांस के जलवायु परिवर्तन पर बयान इस ओर इशारा करते हैं कि पेरिस सम्मेलन में भारत पर अहम वादों के लिए दबाव डाला जाएगा.

इस साल के पर्यावरण शिखर सम्मेलन का लक्ष्य ग्लोबल वॉर्मिंग में वृद्धि की दर को औद्योगिक क्रांति के पहले के स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस तक रोकना है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सीमा से आगे बढ़ने पर बाढ़, तूफान और बढ़ते समुद्री जल स्तर का सामना कर रही धरती पर जीवन के लिए मुश्किलें पैदा होने लगेंगी. क्योटो प्रोटोकॉल में भरी गई हामी के मुताबिक वैश्विक तापमान पर पेरिस सम्मेलन में देशों के बीच कानूनी समझौते की कोशिश है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर्यावरण शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति ओलांद और संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के साथ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की शुरुआत की. यह गठबंधन ऊष्णकटिबंधीय देशों का सहायता संघ होगा ताकि साफ, सस्ती और अक्षय सौर ऊर्जा को इन देशों की पहुंच में लाया जा सके. धनी और विकासशील देशों के बीच इस बात पर गहरे मतभेद हैं कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए कौन क्या करे और इन कदमों का खर्च कौन उठाए. भारत पेरिस पर्यावरण शिखर सम्मेलन में पर्यावरण न्याय की मांग भी करेगा.

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