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दुनिया

भारत के आकाश में पैसों की बरसात

विदेशी एयरलाइन कंपनियां भारत के आकाश में उड़ने को बेताब है. इससे आम लोगों को भी सुविधा मिलेगी और ट्रेनों में भीड़ भी कम होगी.

सस्ती हवाई यात्रा मुहैया कराने वाली दिग्गज कंपनियां भारत के घरेलू बाजार में दाखिल होने की तैयारी कर रही हैं. सबसे आगे कतर एयरवेज के जहाज खड़े हैं. बर्लिन पहुंचे कतर एयरवेज के प्रवक्ता अकबर अल बकर तो इसका साफ संकेत भी दे चुके हैं. अल बकर के मुताबिक कतर एयरवेज की मदद के लिए कतर सरकार का इनवेस्टमेंट फंड भारत में निवेश करेगा.

कतर एयरवेज के प्रवक्ता के मुताबिक कंपनी जल्द ही भारत में घरेलू एयरलाइन्स का लाइसेंस पाने के लिए आवेदन करेगी. कतर एयरवेज ने लंबे समय तक भारतीय कंपनी इंडिगो में हिस्सेदारी खरीदने की कोशिश की. अंत में नाकामी हाथ लगी. लेकिन जून 2016 में केंद्र सरकार ने किसी भारतीय एयरलाइन कंपनी में 100 फीसदी विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी. भारतीय एयरलाइन कंपनियों के हित सुरक्षित रखने के लिये सरकार ने कुछ तकनीकी इंतजाम बरकरार रखे.

नए नियमों के मुताबिक विदेशी एयरलाइन कंपनियों को पहले किसी भारतीय एयरलाइन कंपनी के 49 फीसदी शेयर खरीदने होंगे. और बाकी की 51 फीसदी हिस्सेदारी के लिये विदेशों के निवेश फंड से पैसा जुटाया जा सकेगा. मौजूदा नियमों के मुताबिक, भारत के घरेलू बाजार में उड़ान भरने का लाइसेंस सिर्फ उन्हीं कंपनियों को मिलता है जिनके बोर्ड में दो तिहाई निदेशक भारतीय हों. इसके अलावा सब्सटेंशियल ओनरशिप एंड इफेक्टिव (SOEC) कंट्रोल में भी भारतीय नागरिक होने चाहिए.

फिलहाल ऐसी तीन भारतीय एयरलाइंस हैं जिनमें विदेशी एयरलाइन कंपनियों ने निवेश किया है. इनमें एक जेट एयरवेज है, जिसमें 24 फीसदी हिस्सेदारी अबू धाबी की एतिहाद एयरवेज की है. विस्टारा में सिंगापुर एयरलाइंस की और एयर एशिया इंडिया में एयर एशिया की 49 फीसदी हिस्सेदारी है.

भारत का घरेलू एयरलाइन सेक्टर दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाला बाजार है. विशाल क्षेत्रफल के बावजूद घरेलू हवाई सेवाओं में मामले में देश अब भी पिछड़ा हुआ है. सस्ती हवाई सेवाओं की कमी के चलते भारतीय रेल पर हमेशा जरूरत से कहीं ज्यादा दबाव रहता है. ट्रेनों के जरिये उत्तर से दक्षिण तक और पूरब से पश्चिम तक तीन या चार दिन की रेल यात्रा करने में काफी समय भी जाया होता है.

(दुनिया के 10 सबसे छोटे हवाई रूट)

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