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विज्ञान

भारत की बिजली बनी ऑस्ट्रेलिया का सरदर्द

ऑस्ट्रेलिया ने एक कोयले की खदान को स्वीकृति दी है, जिसके निर्यात से दस करोड़ भारतीयों को बिजली मिल सकेगी. लेकिन पर्यावरणविदों को डर है कि इससे ग्रेट बैरियर रीफ को भारी नुकसान पहुंचेगा.

कोयले की यह खदान ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में है. यहां कोयले के खनन के लिए 189 किलोमीटर लंबी रेल लाइन भी बिछाई जाएगी. हर साल इस खदान से छह करोड़ टन कोयला निकाला जाएगा. भारत के अडानी ग्रुप द्वारा किए गए करार के अनुसार इसकी लागत 16.5 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर है.

ऑस्ट्रेलिया के पर्यावरण मंत्री ग्रेग हंट ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को अनुमति देने से पहले 36 शर्तें रखी गयी थीं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचेगा. एक बयान जारी कर उन्होंने कहा, "हमने कड़े से कड़े नियम लागू किए हैं. हम पर्यावरण की सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर रहे हैं और भूजल की गुणवत्ता को भी."

माना जा रहा है कि यह ना केवल ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा कोयला प्रोजेक्ट होगा, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े प्रोजेक्ट में शुमार होगा. क्वींसलैंड को इससे सालाना तीन अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का फायदा होने की उम्मीद है और हजारों नौकरियां भी बन रही हैं. भारत के लिए यह अहम है क्योंकि इसके इस्तेमाल से देश में दस करोड़ लोगों तक बिजली पहुंचाई जा सकेगी.

राक्षसी खदान

लेकिन पर्यावरणविद इसे 'मॉन्स्टर माइन' यानी राक्षसी खदान का नाम दे रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया में ग्रीनपीस के बेन पीयरसन का कहना है, "आप इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि अगर यह खदान बनी तो इससे ग्रेट बैरियर रीफ पर असर पड़ेगा जो कि एक विश्व सांस्कृतिक धरोहर है. वहां से कोयला निकालने के लिए आपको एबोट प्वाइंट पर एक टर्मिनल बनाना होगा." अडानी ग्रुप को पिछले साल दिसंबर में इस टर्मिनल को बनाने की अनुमति मिल चुकी है और यह ऑस्ट्रेलिया में पर्यावरणविदों के लिए सरदर्द बना हुआ है.

ऑस्ट्रेलिया की कंजर्वेशन फाउंडेशन का कहना है कि यह अनुमति "जल संसाधनों, वन्य जीवन और जलवायु परिवर्तन को रोकने के प्रयासों के लिए एक बुरी खबर है". एक रिपोर्ट जारी कर फाउंडेशन ने कहा है कि इस प्रोजेक्ट में कई अरब लीटर भूजल इस्तेमाल होगा, जिससे किसानों को नुकसान होगा.

ऑस्ट्रेलिया की ग्रीन पार्टी की लारिसा वॉटर्स ने इस फैसले को पर्यावरण के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. सरकार के कार्बन टैक्स कानून की बात करते हुए उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की जरूरत है, जबकि वह एक तरफ तो भारत को हवा की गुणवत्ता खराब करने के लिए कुसूरवार बता रही है और दूसरी ओर खुद जलवायु को तबाह करने में लगी है.

आईबी/एमजे (एएफपी)

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