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मनोरंजन

भारत की निकोल फारिया बनीं मिस अर्थ

भारत की निकोल फारिया ने इतिहास रचते हुए मिस अर्थ का खिताब जीत लिया है. वियतनाम में हुई प्रतियोगिता में निकोल शुरू से ही फेवरिट चल रही थीं. दस साल बाद यह पहला मौका है, जब मिस अर्थ का खिताब भारत आया है.

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बैंगलोर की 20 साल की निकोल खिताब जीतने के बाद फूले नहीं समा रही थीं और उन्होंने कहा कि 84 प्रतियोगियों में सबसे बेहतर बन कर उभरना बहुत अच्छा लग रहा है. हालांकि निकोल ने कहा कि इससे ज्यादा अच्छा उन्हें यह लगा कि अलग अलग संस्कृतियों की लड़कियों के साथ उन्होंने अपना वक्त बिताया और इस दौरान उनके माता पिता और दूसरे अजीज उनके साथ रहे.

बैंगलोर के माउंट कार्मेल कॉलेज में पढ़ाई कर चुकीं फारिया ने कहा कि इस साल 30 अप्रैल को भारत में फेमिना मिस इंडिया अर्थ का खिताब जीता था. इक्वाडोर की जेनिफर स्टेफनी पाजमिनो दूसरे नंबर पर (मिस एयर) रहीं, जबकि थाइलैंड की वाटसोपोर्न वातानाकून तीसरे नंबर (मिस वाटर) पर रहीं. पोर्तो रिको की येडी बोस्क्स चौथे स्थान (मिस फायर) पर चुनी गईं.

निकोल ने फाइनल प्रतियोगिता के दौरान झक सफेद रंग की गाउन पहन रखी थी. यह बहुत फैंसी तो नहीं लेकिन बहुत शानदार दिख रही थी.

आखिर में जजों ने निकोल से पूछा कि वे दिन का कौन सा समय पसंद करती हैं. निकोल ने पूरे आत्मविश्वास से कहा, "सूर्योदय." उन्होंने कहा कि वह युवा हैं और चाहती हैं कि नई सुबह उनके लिए नई शुरुआत लेकर आए. खिताब जीतने के बाद भारत में उनका इंतजार हो रहा है लेकिन वह हफ्ते भर बाद ही लौट पाएंगी.

मिस इंडिया अर्थ जीतने से पहले फारिया एक मॉडल रह चुकी हैं और पर्यावरण के मुद्दे पर काफी काम कर चुकी हैं. उनका कहना है कि बैंगलोर लौटने पर वह चाहेंगी कि साइकिल रिक्शा के पक्ष में अभियान चलाएं.

उनका मानना है कि इससे न सिर्फ नए रोजगार मिलेंगे, बल्कि खतरनाक गैसों को भी कम किया जा सकेगा. फारिया का कहना है कि बैंगलोर में मौसम अच्छा रहता है. इसके बाद भी जब लोग कारों या घरों में एयर कंडीशन का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें देख कर दुख होता है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

संपादनः एस गौड़

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