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डीडब्ल्यू अड्डा

भारत ईयू मुक्त व्यापार के मायने

जर्मन भाषी अखबारों में पाकिस्तान हमेशा की तरह चर्चा में बना हुआ है. पर इस बार कुछ अखबारों ने भूटान की बदलती तस्वीर और भारत व यूरोपीय संघ के संभावित मुक्त व्यापार समझौते पर भी टिप्पणियां की हैं.

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ब्रसेल्स में भारत यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन

भारत और यूरोपीय संघ सालों से मुक्त व्यापार समझौते पर बात कर रहे हैं. यदि इस समझौते को लागू किया जाता है तब दोनों पक्षों के बीच व्यापार करों से जुड़ी बाधाओं को कम किया जा सकता है. लेकिन इस तरह के समझौते से भारत में सस्ती दवाइयां बनाने वाली कंपनियों को नुकसान होगा. साथ ही दुनियाभर के उन मरीजों पर भी असर पड़ेगा जो यूरोपीय देशों से नहीं बल्कि भारत से नॉन ब्रैंडेड दवाएं खरीदते हैं. फ्रांकफुर्टर रुंडशाउ का कहना है

इस समझौते से बहुत से गरीब देशों खासकर अफ्रीकी देशों में दवाओं की आपूर्ति को भारी नुक्सान होगा. अफ्रीका में एड्स जैसे रोगों से निपटने की दवाएं भारत से ही आती हैं. 2008 में जो दवाइयां अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों ने इस काम के लिए खरीदी थीं, उनमें से 20 फीसदी भारत से ली गईं. इसीलिए भारत को गरीबों की फार्मेसी का नाम तक दिया गया है.

यूरोपीय संघ का कहना है कि जो कंपनियां भारत में सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराती है, उन्हें पहले साबित करना होगा कि उनकी दवाएं उनती ही कारगर हैं जितनी यूरोपीय कंपनियों की महंगी दवाएं. साथ ही पेटेंटों को और सुरक्षित करने की भी बात चल रही है. यदि भारतीय दवा उद्योग पर इतनी शर्तें और पाबंदियां लगेंगी, तब दवाइयां महंगी होंगी और सस्ती दवाओं को बाजार में लाना बहुत मुश्किल हो जाएगा.

किसके साथ है पाकिस्तान

पाकिस्तान सरकार लंबे समय से पश्चिमी देशों से सहयोग का वादा करती रही है, लेकिन वह देश के भीतर पश्चिम के खिलाफ मुहिम भी चला रही है. उदाहरण के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अमेरिका को बताती है कि कबायली इलाकों में कहां ड्रोन हमले करने हैं. लेकिन सरकार साथ ही इन हमलों की आलोचना भी करती है. सेना उन्हीं कबायली इलाकों में तालिबान लडाकों को खत्म करने की कोशिश करती है और साथ ही उन्हें

Flash-Galerie Pakistan: Anschlag Pakistan Lahore

पाकिस्तान में बढ़ता चरमपंथ

समर्थन भी देती है. जर्मनी के सबसे प्रसिद्ध दैनिकों में से एक फ्रांकफुर्टर आलगमाइने त्साइटुंग का कहना है कि यह सब जानते हुए भी पश्चिमी देश लाखों और करोड़ों डॉलर एक भ्रष्ट एलीट और सेना को देते हैं, जिसके बारे में यह भी नहीं पता है कि वे लोग हमारे साथ हैं या हमारे खिलाफ लड़ रहे हैं.

पाकिस्तान को नागरिक और सैनिक सहायता के तौर पर दो अरब डॉलर मिल चुके हैं. इसके बावजूद पाकिस्तान यह नहीं सीख पाया है कि किस तरह का व्यवहार उसे इनाम का हकदार बना सकता है. सबसे बडी समस्या यह है कि पाकिस्तान भारत के साथ चल रहे विवाद की खातिर इस्लामी आतंकवादियों को पालना जरूरी समझता है. वह यह भी सोचता है कि ये आतंकवादी ताकतवर बने रहेंगे तो एक दिन शायद पश्चिम को पूरी तरह से अफगानिस्तान छोड़ना होगा, जो पाकिस्तान के हित में है.

महिला आत्मघाती हमलावर

अब तक सुरक्षा एजेंसियां यही सोचती थीं कि इस्लामी आतंकवादियों की हिंसा में पुरुष ही शामिल होते हैं. लेकिन अब महिलाएं भी आत्मघाती हमलावर बन रही हैं. पिछले हफ्ते पाकिस्तान में एक महिला ने खुद को उड़ा कर खार शहर में 45 लोगों की जान ले ली और सैंकड़ों को घायल कर दिया. ये लोग संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम के तहत राशन लेने के लिए कतार में खड़े थे.

बर्लिन के दैनिक बर्लिनर त्साइटुंग का कहना है कि खार बाजौड़ एजेंसी का सबसे बड़ा शहर है जो अफगानिस्तान की सीमा के निकट है. इस शहर में ज्यादातर पश्तून रहते हैं. पाकिस्तानी सेना दावा कर रही

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