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जर्मन चुनाव

भारत अमेरिका रक्षा सहयोग बढ़ाने की मांग

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे से पहले दो अमेरिकी समाजशास्त्रियों ने कहा है कि चीन भारत के प्रति ताकत की कूटनीति चला रहा है. उन्होंने भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की मांग की है.

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अमेरिका के प्रतिष्ठित द हेरिटेज फाउंडेशन के डीन चेंग और लीजा करटिस ने कहा है कि पिछले कुछ सालों में भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद पर तनाव बढ़ा है. उन्होंने कहा, "तनाव के स्रोत बहुआयामी हैं, लेकिन मुख्य रूप से उभरते भारत पर चीन की चिंता और तिब्बत में स्थिति को सुदृढ़ करने की इच्छा से संचालित हैं."

चेंग और करटिस का कहना है कि दोनों एशियाई शक्तियों के बीच निकट भविष्य में सैनिक विवाद की संभावना नहीं है लेकिन चीन की हाल की कार्रवाईयां बीजिंग की ताकत की कूटनीति की व्यापक रुझान दिखाती है. उन्होंने अपने एक लेख में भारतीयों को अलग कागज पर वीजा देने, एक सैनिक कमांडर को वीजा देने से इंकार करने और गिलगिट बाल्टिस्तान में सेना भेजने के प्रकरणों का जिक्र करते हुए कहा है कि अमेरिका को भारत चीन संबंधों पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा, "अमेरिका को खौलते चीन-भारत सीमा विवाद पर करीबी निगाह रखनी चाहिए और समन्वित समुद्री सुरक्षा कार्यक्रम, संयुक्त सैनिक अभ्यास और रक्षा व्यापार के जरिए भारतअमेरिकी रक्षा सहयोग बढ़ाने की योजना जारी रखनी चाहिए, जो आधुनिक सैनिक तकनीकी हासिल करने में भारत की मदद करेंगे."

हिंग महासागर में चीनी उपस्थिति की बराबरी करने के लिए भारत के साथ सहयोग की मांग करते हुए चेंग और करटिस ने लिखा है, "भारत की नौसैनिक क्षमताओं को देखते हुए अमेरिकी नौसेना को अपने भारतीय साथियों के साथ मेलजोल बढ़ाना चाहिए ताकि भारत की नौसैनिक क्षमताएं बेहतर हो सकें और चीन को संकेत दिया जा सके कि उसकी कार्रवाईयों का नई दिल्ली और वाशिंग्टन साझा जवाब देंगे."

उधर अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पीजे क्राउली ने अमेरिका और भारत के संबंधों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि राष्ट्रपति बराक ओबामा नवंबर में होने वाले अपने पहले भारतीय दौरे का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. दौरे के एजेंडे के बारे में पूछे जाने पर क्राउली ने कहा, "उभरती वैश्विक सत्ता के रूप में भारत क्षेत्र की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए जरूरी होगा."

रिपोर्ट: पीटीआई/महेश झा

संपादन: उ भट्टाचार्य

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