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दुनिया

भारत अमेरिका में सहयोग पर भड़का पाकिस्तान

भारत और अमेरिका के बीच परमाणु ऊर्जा के मामले में बढ़ते सहयोग ने पाकिस्तान को परेशान कर दिया है. पाकिस्तान ने भारत को परमाणु ऊर्जा से जुड़ी चीजों और तकनीक के निर्यात पर रोक हटाने के खिलाफ ताकतवर देशों को चेतावनी दी है.

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भारत के प्रमुख अंतरिक्ष और रक्षा संगठनों को तकनीकी निर्यात पर रोक वाले संगठनों की सूची से बाहर कर दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत जमीर अकरम ने कहा है कि अमेरिका का यह कदम दक्षिण एशिया को अस्थिरता की ओर ले जा सकता है.

अकरम ने कहा कि पाकिस्तान ने एक साल पहले भी दुनिया में परमाणु बम बनाने वाले सामानों की खरीद फरोख्त पर पाबंदी लगाने की बात कही थी. पाकिस्तानी राजदूत के मुताबिक, "हाल में हुई घटनाक्रम रणनीति में बड़े बदलाव के संकेत हैं. इससे यह संदेश गया है कि बड़े देश अपने फायदे के लिए कभी भी नियमों को बदल सकते हैं." जिनीवा में संयुक्त राष्ट्र की तरफ से निरस्त्रीकरण पर अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस चल रही है. इसी कान्फ्रेंस में जमीर अकरम ने ये बातें कही.

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अकेला पड़ा पाकिस्तान

कान्फ्रेंस में मौजूद 65 सदस्य देश परमाणु सामग्री के मसले पर एक सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इनमें पाकिस्तान इकलौता ऐसा देश है जो यह मांग कर रहा है कि दुनिया में मौजूद प्लूटोनियम और संवर्धित यूरेनियम के भंडार को भी इस बातचीत में शामिल किया जाए. पाकिस्तान इस मांग के जरिए भारत को निशाना बनाने की कोशिश में है.

अमेरिका ने भारत के साथ 2008 में शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु समझौता किया और इसके साथ परमाणु ऊर्जा के मामले में अलग थलग पड़ा भारत अंतरारष्ट्रीय बिरादरी में शामिल हो गया. भारत के लिए अब अपने परमाणु रिएक्टरों के लिए ईंधन और तकनीक हासिल करना मुमकिन हो गया है. इसके साथ ही वह अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम भी चला सकता है.

अमेरिका का एलान

ओबामा प्रशासन ने एलान किया है कि वह भारत की परमाणु ऊर्जा से जु़ड़े चार प्रमुख संगठनों की सदस्यता के लिए समर्थन करेगा. ये चार संगठन हैं - न्यूक्लिलयर सप्लायर्स ग्रुप, मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम, ऑस्ट्रेलियन ग्रुप, और वासेनार अरेंजमेंट. इनमें ऑस्ट्रेलियाई ग्रुप रसायनिक और जैविक हथियारों का प्रसार रोकने के लिए काम करता है जबकि वासेनार अरेंजमेंट पारंपरिक हथियारों और दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीकों के एक हाथ से दूसरे हाथ में जाने को रोकने के लिए काम करता है.

पाक की परेशानी

अमेरिका ने अपनी तरफ से पहल कर दी है और अब भारत के लिए इन गुटों तक पहुंचने का रास्ता आसान हो गया है. ऐसे में पाकिस्तान की चिंता बढ़ना लाजमी है. जमीर अकरम ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार संगठन की वैधता और पवित्रता को तो धक्का पहुंचा ही है, इन कदमों से दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर भी असर पड़ेगा." 46 सदस्यों वाला न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यह सुनिश्चित करता है कि निर्यात की गई परमाणु सामग्री का इस्तेमाल हथियार बनाने के लिए न हो. लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि भारत इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने और उन्हें ढोने की क्षमता हासिल करने में लगाएगा. अकरन ने कहा, "इसका नतीजा यह होगा कि पाकिस्तान को अपने परमाणु हथियारों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करनी होगी."

बदनाम इतिहास

परमाणु मसले पर पाकिस्तान की इज्जत पर सबसे बड़ा धब्बा तब लगा जब देश के सबसे बड़े परमाणु वैज्ञानिक एक्यू खान के ईरान, उत्तर कोरिया और लीबिया को परमाणु तकनीक बेचने की बात सामने आई. हालांकि इसके बाजवजूद चीन ने पाकिस्तान के साथ परमाणु मसले पर सहयोग जारी रखा है. पाकिस्तान राजदूत ने अपने पूरे भाषण में इस बात का कहीं जिक्र नहीं किया कि चीन ने पाकिस्तान के लिए दो परमाणु रिएक्टर बनाने का प्रस्ताव दिया है. इस प्रस्ताव ने परमाणु अप्रसार में जुटे देशों के माथे पर बल डाल दिए हैं. परमाणु सामग्रियों का आयात करने के लिए पांच सबसे बड़े देशों के अलावा हरेक देश को अपने परमाणु ऊर्जा के ठिकानों को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में रखना पड़ता है. अमेरिका ने जब भारत के साथ परमाणु सहयोग पर करार किया तो उसे इस शर्त से छूट दे दी गई.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः वी कुमार

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