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भारतीय हवाई सीमा के लिए नई राडार प्रणाली

हवाई सीमा के अतिक्रमण पर काबू पाने के लिए भारतीय सेना की ओर से देश के उत्तरी और उत्तर पूर्वी पहाड़ी सीमाक्षेत्र में राडार प्रणाली की तैनाती की योजना बनाई जा रही है.

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इस सिलसिले में ख़ासकर पिछले वर्ष जम्मू कश्मीर में चीनी हेलिकॉप्टरों द्वारा हवाई सीमा के अतिक्रमण को ध्यान में रखा गया है. वायुसेना के अधिकारियों का कहना है कि वे उत्तरी और पूर्वी सीमा के समूचे पहाड़ी क्षेत्र में राडार प्रणाली तैनात करना चाहते हैं, ताकि सीमा के निकट उड़ान भरने वाले "दुश्मनों के विमानों और हेलिकॉप्टरों का पता लगाया जा सके और उन पर नज़र रखी जा सके."

पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर प्रदेश के लेह, दामचोक और ट्रिग पहाड़ी के क्षेत्र में चीन के दो एमआई-17 प्रकार के हेलिकॉप्टर घुस आए थे और उन्होंने सूअर के मांस व बैंगन से भरे टीन के डिब्बे गिराए थे. वायुसेना का कहना है कि अभी तक इन क्षेत्रों में चीन की ओर से किए जा रहे ऐसे अतिक्रमण के मामलों पर नज़र रखने की कोई व्यवस्था नहीं है. इस हालत को बदलने के लिए राडार प्रणालियां ख़रीदी जा रही हैं, जिन्हें इन क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा.

इन प्रणालियों को साढ़े चार हज़ार मीटर की ऊंचाई पर तैनात किया जाएगा और वे कड़ी ठंड में भी काम करने के काबिल होंगी. उनके ज़रिये छोटे व बड़े सभी विमानों और मानवरहित स्वचालित विमानों का भी पता लगाया जा सकेगा. इन प्रणालियों को वायुसेना की समग्र नियंत्रण प्रणाली से जोड़ा जाएगा, ताकि अतिक्रमण होने पर फ़ाइटर विमानों और अन्य विमानों को उनका पीछा करने के लिए निर्देश दिया जा सके.

कारगिल युद्ध से पहले भी अपने सैनिकों की घुसपैठ करवाने और भारतीय क्षेत्र के अंदर अपने मज़बूत अड्डे बनाने के लिए पाकिस्तानी विमानों ने कई बार भारतीय हवाई सीमा का अतिक्रमण किया था. लेकिन वे पकड़ में नहीं आए थे.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उभ

संपादन: राम यादव

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