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दुनिया

भारतीय शांति रक्षकों की मौत

दक्षिणी सूडान में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के शिविर पर हमले में तीन भारतीय शांति रक्षक मारे गए. वहां तैनात भारतीय सेना के एक अधिकारी ने डॉयचे वेले को बताया कि सभी भारतीय सैनिक सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचा दिए गए हैं.

भारतीय शांति रक्षकों की विद्रोहियों से हिंसक मुटभेड़ में हत्या के बाद संयुक्त राष्ट्र ने बचाव अभियान शुरू कर दिया. संयुक्त राष्ट्र ने दक्षिण सूडान के आकोबो प्रांत से करीब 40 शांति रक्षकों को सुरक्षित निकालने के लिए चार हेलिकॉप्टर भेजे थे. इन सभी को बहां से निकाल कर मलाक्कल में स्थित संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षित कंपाउंड में पहुंचा दिया गया है. इस बेस कैंप में सरकार समर्थक डिंका लोगों ने शरण ले रखी थी जिन्हें सरकार विरोधी नॉयर लोग हिंसा का शिकार बना रहे थे.

सूडान में मौजूद भारतीय सेना के एक अधिकारी ने डॉयचे वेले से बातचीत में बताया, "कल दिन में नॉयर लोगों ने हमारे पोस्ट को घेरना शुरू कर दिया और काफी बड़ी संख्या में अंदर घुस आए और गोलियां चलानी शुरू कर दीं. जवाबी कार्रवाई में हमारे सैनिक मारे गए."

पिछले रविवार को राजधानी जूबा में शुरू हुई हिंसा में अब तक 450 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें लगभग 100 सैनिक हैं. हिंसा का कारण राष्ट्रपति सल्वा कीर और पूर्व उप राष्ट्रपति रीक मशार के बीच सत्ता संघर्ष बताया जा रहा है. राष्ट्रपति कीर ने जुलाई में मशार को उनके पद से हटा दिया था. माना जा रहा है कि इस हमले को जिस विद्रोही नॉयर यूथ्स समूह ने अंजाम दिया वो सरकार के धुर विरोधी जनरल के समर्थक हैं. राष्ट्रपति ने मशार पर आरोप लगाया है कि वे देश में सत्ता पलटने की कोशिश कर रहे हैं.

गृह युद्ध का खतरा

विद्रोहियों ने गुरुवार को जोंगलाई प्रांत में संयुक्त राष्ट्र के एक ठिकाने पर हमला बोल दिया. यूएन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में करीब 14 केन्द्र हैं, जहां हिंसक वारदात दर्ज की गई हैं. जोंगलाई प्रांत में समस्या सबसे ज्यादा है, जहां करीब 34,000 नागरिकों ने संयुक्त राष्ट्र के शिविरों में शरण ले रखी है. यूएन ने बयान जारी कर बताया, "इस बात के संकेत मिले हैं कि इस हमले में आम नागरिकों की भी जान गई है." सूडान में संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में 2,200 शांति सैनिकों की दो बटालियन तैनात हैं. इनमें से एक जोंगलाई में है जबकि दूसरा मलाक्कल में. इससे पहले भी इन शांति सैनिकों पर हमला हो चुका है.

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दक्षिण सूडान में अमेरिकी सेना की 45 टुकड़ियों को तैनात करने का एलान किया था. ओबामा ने आगाह किया है कि दक्षिण सूडान पर बढ़ती हिंसक वारदातों की वजह से गृह युद्ध का खतरा मंडरा रहा है. बहुत सारे नागरिक हिंसा की चपेट में आने के डर से अपना घर छोड़ कर भी जा रहे हैं. "हिंसा की ये ताजा घटनाएं दक्षिण सूडान को इतिहास के बुरे दिनों में ले जा सकते हैं", ओबामा ने कहा. अमेरिका और ब्रिटेन ने पहले ही दक्षिण सूडान से अपने नागरिकों को वापस बुला लिया है.

भारत की मदद

दक्षिणी सूडान जुलाई 2011 में सूडान से कई दशकों के गृह युद्ध के बाद अलग हुआ. हालांकि दोनों पक्ष अलग होते वक्त भी कई मुद्दों पर सहमति नहीं बना पाए. इनमें तेल निर्यात और सीमा से जुड़े मामले हैं. दोनों सूडानी देश एक दूसरे पर अशांति फैलाने का आरोप लगाते हैं.

भारत एशिया से पहला देश है, जिसने दक्षिणी सूडान की राजधानी जूबा में अपना वाणिज्य दूतावास खोला. 2007 में वाणिज्य दूतावास खोलने के बाद 2011 में जब दक्षिणी सूडान दुनिया का 193वां स्वतंत्र देश बना तो उसे उसी दिन से मान्यता देने वाले देशों में भारत भी शामिल है. सूडान की आजादी के जश्न में शामिल होने खुद भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल भी एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मौजूद थीं. भारत संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में मदद करने वाले प्रमुख देशों में है.

आरआर/एजेए (एएफपी, एपी, डीपीए)

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