1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

खेल

भारतीय मुक्केबाजों ने ली राहत की सांस

इंचियोन के बॉक्सिंग मैचों के स्टेडियम देख कर भारत के बॉक्सर शिव थापा ने राहत की सांस ली. इसलिए नहीं कि उन्हें पहले राउंड में वॉकओवर मिल गया. कारण कुछ और है.

उन्हें यह देख कर शांति हुई कि मैचों के दौरान कोने में उनके साथ उनके कोच भी होंगे. थापा और बाकी 12 भारतीय मुक्केबाजों के लिए दो साल से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कोई कोच ही नहीं था, क्योंकि इंडियन बॉक्सिंग फेडरेशन पर प्रतिबंध लगा हुआ था. और इसका मतलब था कि भारतीय मुक्केबाजों को स्वतंत्र एथलीट की तरह प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना पड़ता था, भारत की टीम में नहीं. और कोच इन स्वतंत्र खिलाड़ियों के साथ नहीं जा सकते थे.

ग्लास्गो में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में भी भारतीय बॉक्सरों को भारत के झंडे के नीचे प्रतियोगिताओं में शामिल होने पर रोक थी. लेकिन चूंकि अब राष्ट्रीय संघ के चुनाव जल्द ही होने वाले हैं, एशियन गेम्स के शुरू होने से ठीक पहले मुक्केबाजों को कोचों के साथ आने की अनुमति मिल गई.

56 किलोग्राम श्रेणी में दुनिया में तीसरी रैंकिंग वाले शिव थापा ने कहा, "हमारे लिए यह राहत है क्योंकि मुक्केबाजों को प्रशिक्षकों की जरूरत होती है. वे हमें गाइड करते हैं और जब वो हमारे साथ होते हैं तो हमें विश्वास मिलता है. मुक्केबाजी प्रतियोगिता के दौरान कोच ही रिंग की नीति तैयार करते हैं और बताते हैं कि अगले दौर में बेहतरी के लिए क्या तकनीक अपनाई जा सकती है."

थापा का मानना है प्रशिक्षकों की मदद से टीम का प्रदर्शन अच्छा होगा. उन्होंने कहा, "भारत का प्रतिनिधित्व करना बड़ी बात है. इससे प्रेरणा मिलती है और हम उम्मीद करते हैं कि हम यहां अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे."

पिछले एशियाई खेलों में भारत ने बॉक्सिंग में नौ मेडल जीते थे जिनमें से दो स्वर्ण थे. भारत को उम्मीद है कि वह 2010 के 65 मेडलों की संख्या तक पहुंच जाएगा. हालांकि टीम के प्रमुख कोच गुरबक्श संधु भी नहीं जानते कि वह क्या उम्मीद रखें. वह कहते हैं, "यहां बहुत अच्छा करना हमारे लिए आसान नहीं होगा. मेरे लिए अपने बॉक्सरों का विश्लेषण करना और नीति बनाना मुश्किल है क्योंकि मैंने उन्हें पिछले अंतरराष्ट्रीय मैचों में नहीं देखा है." संधु इससे पहले की ट्रिप पर साथ नहीं थे.

भारतीय बॉक्सर टीम में पांच बार की महिला विश्व चैंपियन मेरी कोम भी है. लेकिन विजेंदर सिंह नहीं हैं. पुराने भारतीय मुक्केबाजी संघ को विश्व बॉक्सिंग संस्था एआईबीए ने दिसंबर 2012 में संघ के चुनावों के दौरान सही प्रक्रिया नहीं अपनाने के आरोप में निलंबित कर दिया था. उन्होंने पुराने अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला को ही फिर से पद पर बिठा दिया. चौटाला को भारतीय ओलंपिक समिति का भी अध्यक्ष बनाया गया और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति से भी भारत (आईओए) को बाहर होना पड़ा. नए चुनावों के बाद आईओए को फिर से ओलंपिक समिति में शामिल किया गया है.

एएम/एमजे (एपी)

DW.COM