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खेल

भारतीय फुटबॉलरों के लिए मौका

भले ही भारत में फुटबॉल का स्तर दिन ब दिन गिरता जा रहा हो लेकिन देश में उपभोक्ताओं की बड़ी संख्या और स्थिर आर्थिक स्थिति देशी और विदेशी कंपनियों को भारतीय फुटबॉल की ओर खींच रही है.

भारत में टीवी के जरिए यूरोपीय फुटबाल और विदेशी क्लबों के चाहने वालों की बड़ी तादाद भी इन कंपनियों के लिए एक बड़ा आकर्षण है. जब दिल्ली में भारती एयरटेल कंपनी ने अपने 'एयरटेल राइजिंग स्टार' कार्यक्रम के दूसरे संस्करण का उद्घाटन किया तो प्रेस कांफ्रेंस में मैनचेस्टर यूनाइटेड के मशहूर खिलाडी गैरी पैलिस्टर भी मौजूद थे. लगभग सभी पत्रकारों ने इस मशहूर खिलाडी में तो काफी रूचि दिखाई लेकिन

युवा खिलाडियों पर कार्यक्रम में किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया.

ऐसा नहीं कि एयरटेल का कार्यक्रम भी कोई बहुत प्रभावशाली हो. एयरटेल देश के सात शहरों में तीन महीने के एक कार्यक्रम का आयोजन करेगा जिसमें 450 स्कूलों से 16 साल से कम उम्र के खिलाड़ी भाग लेंगे. यह स्कूल मुंबई, दिल्ली, गोवा, कोलकाता, बैंगलोर, हैदराबाद और गुवाहाटी के होंगे.
एक गोलकीपर के अलावा हर शहर से और तीन-तीन खिलाड़ी लिए जाएंगे. बाद में सात में से दो गोलकीपरों को रखा जाएगा. चुने हुए 21 खिलाड़ियों के साथ वे गोवा में फाइनल ट्रायल में हिस्सा लेंगे. गोवा में पांच दिन की ट्रायल के बाद इनमें से 11 खिलाडियों को मैनचेस्टर यूनाइटेड फुटबॉल स्कूल में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा.
सवाल यह है कि फुटबॉल जैसे टीम गेम में अलग अलग स्कूलों के बच्चों को ट्रेनिंग तो दे दी जाएगी लेकिन उसके बाद क्या होगा? यह पूछे जाने पर कि क्या एयरटेल इन किशोरों को लेकर किसी टीम का गठन करेगा, एयरटेल के मुख्य ब्रांड मैनेजर मोहित बिओत्रा ने साफ कहा कि उनकी कंपनी की टीम बनाने में कोई रूचि नहीं है. "हम तो फोन के जरिए लोगों को जोड़ने का काम करते हैं." ऐसे में एयरटेल का कार्यक्रम कितना भी मजबूत हो और खिलाड़ी कितनी भी अच्छी ट्रेनिंग पा लें उन्हें इस कार्यक्रम से लाभ मिलने वाला नहीं है. एयरटेल के कार्यक्रम के लिए पैलिस्टर ने कहा कि कम से कम खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अच्छा मौका तो मिलेगा.


भारतीय फुटबॉल महासंघ और आईएमजी रिलायंस के साझा क्रिकेट लीग आईपीएल की तर्ज पर प्लान किये जाने वाले फुटबॉल टूर्नामेंट के बारे में इंग्लैंड और मैनचेस्टर यूनाइटेड के पूर्व डिफेंडर पैलिस्टर ने कहा कि अगर यह हो सका तो यह अच्छा कदम होगा. पिछले कार्यक्रम के अंतर्गत मैनचेस्टर यूनाइटेड फुटबॉल स्कूल में प्रशिक्षण पा चुके दिल्ली के कार्तिकेय स्वरुप और मुकुल महेंदर ने ट्रेनिंग और अनुभव को तो अच्छा बताया लेकिन टीम के गठन पर कुछ नहीं कहा. उनकी खामोशी उनके दिल का हाल बयां कर रही थी.

रिपोर्ट: नॉरिस प्रीतम, नई दिल्ली

संपादन: आभा मोंढे

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